February 11, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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डोल-नगाड़ों की गूंज में शिवमय हुआ वनांचल, कलदामार–तराईमार में गौरा-गौरी पूजन महोत्सव ने रचा आस्था, परंपरा और उल्लास का अद्भुत इतिहास

 

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****///कोरबा जिले के रामपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत वनांचल अंचल के ग्राम कलदामार एवं तराईमार में आयोजित रात्रिकालीन गौरा-गौरी पूजन महोत्सव श्रद्धा, भक्ति, लोकसंस्कृति और उत्साह के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर पूरा क्षेत्र भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति में सराबोर नजर आया। डोल-नगाड़ों, बाजे-गाजे और पारंपरिक गीत-संगीत के साथ वनांचल की संस्कृति जीवंत हो उठी।

 

 

इस भव्य आयोजन में प्रदेश उपाध्यक्ष श्री टिकेश्वर राठिया की विशेष उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी गरिमामयी बना दिया। डोल-नगाड़ों की थाप पर वे ग्रामीणों के साथ स्वयं थिरकते नजर आए। उनका यह आत्मीय और सरल व्यवहार ग्रामीणों के दिलों को छू गया, जिससे पूरे आयोजन में उल्लास और उत्साह का नया संचार हुआ।
महोत्सव में विशिष्ट अतिथि के रूप में
कोरबा जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती बिजमोती राठिया,
जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रेणुका राठिया,
जिला सदस्य प्रतिनिधि श्री कमलेश अनंत,
जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि श्री अभिमन्यु राठिया
की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी जनप्रतिनिधियों ने ग्राम देवी-देवताओं सहित भगवान शिव एवं माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना कर क्षेत्रवासियों की सुख-शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

 

 

 

गौरा-गौरी पूजन महोत्सव के दौरान भगवान शिव की भव्य बारात निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा में सजे ग्रामीण, डोल-नगाड़ों की गूंज और जयघोष से पूरा गांव शिवमय वातावरण में डूब गया। विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम में आसपास के गांवों से आईं कर्मा नृत्य मंडलियों ने अपने सशक्त और मनमोहक नृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। देर रात तक चले इस आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर गौरा-गौरी पर्व का भरपूर आनंद लिया।
यह महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि वनांचल क्षेत्र की लोकसंस्कृति, सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे को सशक्त करने वाला आयोजन भी सिद्ध हुआ। गौरा-गौरी पूजन महोत्सव ने एक बार फिर साबित कर दिया कि छत्तीसगढ़ की परंपराएं आज भी जनमानस के हृदय में जीवंत हैं।

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