आयुर्वेदिक उपचार से 14 वर्षों की अनिद्रा और घबराहट से मिली मुक्ति, दो माह में बदली रामरतन साह की ज़िंदगी






त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** कोरबा। आज के तनावपूर्ण जीवन में अवसाद (एंग्जायटी), अनिद्रा, घबराहट और बेचैनी जैसी समस्याएं तेजी से आम होती जा रही हैं। इन मानसिक व शारीरिक परेशानियों से जूझ रहे लोगों के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सा एक नई आशा की किरण बनकर सामने आई है। मुड़ापार निवासी रामरतन साह पिछले 14 वर्षों से अनिद्रा, घबराहट, बेचैनी, डर, दिल की धड़कन बढ़ने और किसी भी काम में मन न लगने जैसी गंभीर समस्याओं से पीड़ित थे। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी थी कि वे अपनी परेशानी किसी से ठीक से साझा भी नहीं कर पाते थे।
लगातार परेशानी से बचने के लिए रामरतन साह वर्षों से नींद की गोलियों का सहारा ले रहे थे, लेकिन समस्या कम होने के बजाय बढ़ती चली गई। दवाइयों के लंबे सेवन के कारण उनकी आंखों की रोशनी कमजोर होने लगी और घुटनों में दर्द भी रहने लगा। अनेक प्रकार के इलाज और उपाय आज़माने के बाद जब कहीं से राहत नहीं मिली, तब निराश होकर उन्होंने आयुर्वेदिक चिकित्सा पर भरोसा करने का निर्णय लिया।
इसी क्रम में वे निहारिका स्थित श्री शिव औषधालय पहुंचे, जहां नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा द्वारा रोगी की त्रिविध परीक्षा एवं नाड़ी परीक्षण कर उनकी प्रकृति और रोग का गहन अध्ययन किया गया। इसके पश्चात उन्हें आयुर्वेदिक औषधियां, दिनचर्या से जुड़े नियम और आवश्यक परहेज बताए गए। रामरतन साह ने चिकित्सक के निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन किया।

परिणाम चौंकाने वाले रहे। मात्र दो माह के भीतर उनकी वर्षों पुरानी समस्याएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगीं। घबराहट, बेचैनी, भय, अनिद्रा और एकाग्रता की कमी जैसी परेशानियां दूर हो गईं। लंबे समय से कमजोर पड़ रही आंखों की रोशनी में भी सुधार महसूस हुआ और घुटनों के दर्द से भी राहत मिली। सबसे बड़ी बात यह रही कि वर्षों से निर्भर नींद की गोलियां भी पूरी तरह छूट गईं।
रामरतन साह ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें विश्वास ही नहीं था कि आयुर्वेदिक चिकित्सा इतनी जल्दी और प्रभावी परिणाम दे सकती है। उन्होंने बताया कि पहले जहां निराशा और डर का माहौल था, वहीं अब वे स्वयं को पूरी तरह स्वस्थ और आत्मविश्वास से भरा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने आयुर्वेद पर पूर्ण भरोसा जताते हुए अपने परिवारजनों को भी आयुर्वेदिक उपचार के लिए प्रेरित करने तथा अन्य लोगों को भी इस पद्धति को अपनाने की सलाह देने की बात कही।
इस अवसर पर नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने कहा कि यह किसी व्यक्ति का चमत्कार नहीं, बल्कि आयुर्वेद की शक्ति है। आयुर्वेद ऋषि-परंपरा की अमूल्य देन है, जो शाश्वत, प्राकृतिक, शुद्ध और निरापद चिकित्सा पद्धति है। हम सभी उस विधा के अनुयायी हैं और इस पर हमें गर्व है कि हम उस प्राचीन ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। सही परीक्षण, अनुशासित दिनचर्या, परहेज और नियमित उपचार से जटिल रोगों में भी सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।
यह घटना आयुर्वेदिक चिकित्सा की प्रभावशीलता को दर्शाती है और अवसाद (एंग्जायटी), अनिद्रा, घबराहट जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए आशा की नई किरण बनकर सामने आई है। आयुर्वेद के प्रति लोगों का बढ़ता विश्वास यह संकेत देता है कि प्राकृतिक और समग्र चिकित्सा पद्धति भविष्य में भी समाज को स्वस्थ दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।





