August 14, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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पाली में गूंजा अंत्योदय का संदेश— पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की 58वीं पुण्यतिथि पर भाजपा मंडल पाली ने किया भावपूर्ण स्मरण, विचारों को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प

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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** पाली अंत्योदय और एकात्म मानववाद के अमर प्रणेता, भारतीय राजनीति को विचारधारा की सुदृढ़ दिशा देने वाले महान चिंतक पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की 58वीं पुण्यतिथि (11 फरवरी 2026) के अवसर पर भाजपा मंडल पाली द्वारा महामाया मंदिर प्रांगण में गरिमामय श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उनके तैलचित्र पर दीप प्रज्वलित कर पुष्पांजलि अर्पित की गई तथा उनके विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित कार्यकर्ताओं एवं नगरवासियों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के त्याग, तपस्या, संघर्ष और राष्ट्रनिर्माण में उनके अतुलनीय योगदान को स्मरण किया। वातावरण “राष्ट्र प्रथम” और “अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक विकास” की भावना से ओत-प्रोत रहा।

 

 

 

विचारधारा को जीवन में उतारने का आह्वान
मंडल अध्यक्ष श्री चंद्रशेखर पटेल जी ने अपने संबोधन में कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और मूल्यों पर आधारित समग्र विकास के महान मार्गदर्शक थे। उनके विचार आज भी राष्ट्रनिर्माण की ठोस नींव हैं और कार्यकर्ताओं को जनसेवा के पथ पर प्रेरित करते हैं।
मंडल उपाध्यक्ष श्री हरीश चावड़ा जी ने कहा कि अंत्योदय और एकात्म मानववाद का दर्शन आज भी उतना ही प्रासंगिक है। यह विचारधारा समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुँचाने की प्रेरणा देती है और राष्ट्र को आत्मनिर्भर व समरस बनाने का मार्ग दिखाती है।
वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता श्री रामायण सिंह राज, नगर पंचायत उपाध्यक्ष श्री लखन प्रजापति, मंडल मंत्री श्री आशीष अग्रवाल, श्री अखिलेश वैष्णव, श्री संजय छाबड़ा, श्री गुरदयाल सिंह, श्री अगर दास, श्री गणेश चौहान सहित भाजपा के अनेक पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने और संगठन को सशक्त बनाने का संकल्प लिया।
श्रद्धांजलि नहीं, संकल्प का दिवस
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित जनों ने यह संकल्प दोहराया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के सिद्धांतों को केवल स्मरण तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि सेवा, संगठन और समर्पण के भाव के साथ उन्हें व्यवहार में उतारकर समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जाएगा।

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