August 15, 2026

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राज्योत्सव 2025 कोरबा: अलका चंद्राकर की मधुर आवाज़ से गूँजा शहर, लोकसंस्कृति की झलक ने जीता दर्शकों का दिल

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घण्टाघर मैदान में राज्योत्सव की दूसरी शाम छत्तीसगढ़ी संगीत-संस्कृति के रंग में डूबी
स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों ने समां बांधा, दर्शकों ने की जमकर सराहना

 त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/कोरबा, 03 नवम्बर 2025।
छत्तीसगढ़ राज्य के गठन की रजत जयंती के अवसर पर प्रदेश भर में राज्योत्सव 2025 का उल्लास छाया हुआ है। इसी कड़ी में कोरबा नगर के घण्टाघर स्थित ओपन थिएटर मैदान में आयोजित तीन दिवसीय जिला स्तरीय राज्योत्सव के दूसरे दिन छत्तीसगढ़ी लोक-संस्कृति, संगीत और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।

 

 

 

 

मंच पर जब प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी लोकगायिका अलका चंद्राकर ने अपनी मधुर वाणी में “मया दे दे मोर गो मया दे…” और “तरी हरि ना… सुआ लहकत हे डार मा…” जैसे लोकप्रिय जसगीतों की प्रस्तुति दी, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनकी आवाज़ में छिपी भक्ति, लोकभावना और मातृभूमि के प्रति प्रेम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम का आगाज़ मां जगदंबा की आराधना से हुआ, जिसके बाद अलका चंद्राकर ने एक से बढ़कर एक पारंपरिक छत्तीसगढ़ी गीत प्रस्तुत कर दर्शकों के हृदय को छू लिया।

 

 

 

सिर्फ अलका चंद्राकर ही नहीं, बल्कि स्थानीय कलाकारों ने भी इस शाम को अविस्मरणीय बना दिया। इशिता कश्यप, स्नेहा भक्ता, अशवीका साव, अरशिका आर्या, मौली राठौर, मोहम्मद इस्माइल शेख, अपूर्वा सिंह, धारा सोनवानी, पृथा मिश्रा, भारती चौरसिया, मोनिका अग्रवाल, गायत्री दीवान, कृष्ण नंद चौहान, जया राठौर, धनसाय साहू, थिरमन दास आदि कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, गीत-संगीत और नाट्य रूपांतरणों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा को सजीव कर दिया।

हर प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। मंच पर झूमते कलाकार और दर्शकों की उमंग ने इस सांस्कृतिक शाम को यादगार बना दिया।

कार्यक्रम में नगर निगम सभापति श्री नूतन सिंह ठाकुर, सीईओ जिला पंचायत श्री दिनेश नाग, डॉ. राजीव सिंह, श्री गोपाल मोदी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं नागरिकगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

राज्योत्सव का यह दूसरा दिन न केवल छत्तीसगढ़ी संस्कृति का गौरवपूर्ण प्रदर्शन था, बल्कि यह इस बात का भी प्रतीक रहा कि पृथक छत्तीसगढ़ के सपने को साकार करने के 25 वर्षों बाद भी यहां की मिट्टी की सुगंध, संगीत और परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत और प्रेरणादायी है।

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