सीपत थाने में ब्लैकमेलिंग और वसूली का काला खेल उजागर — पुलिस की दबंगई से व्यापारी ने दी रिश्वत, एनटीपीसी कर्मचारी ने खाया ज़हर — ऑनलाइन सबूतों के साथ एसएसपी से शिकायत, जांच शुरू






त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ (बिलासपुर, छत्तीसगढ़)। ज़िले के सीपत थाना क्षेत्र से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिला कर रख दिया है। पुलिसकर्मियों पर व्यापारियों और आम नागरिकों से कार्रवाई का भय दिखाकर अवैध वसूली और ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस की इसी दबंगई और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर एक एनटीपीसी कर्मचारी ने आत्महत्या का प्रयास करते हुए ज़हर खा लिया, जबकि एक अन्य व्यापारी ने रिश्वत की राशि का ऑनलाइन ट्रांज़ैक्शन सबूतों सहित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को शिकायत सौंपी है।

📝 पहला मामला — एनटीपीसी कर्मचारी ने ज़हर खाकर दी ज़िंदगी खत्म करने की कोशिश
उज्जवल नगर, एनटीपीसी कॉलोनी निवासी धीरेंद्र मंज़ारे (35 वर्ष), जो एनटीपीसी के एचआर विभाग में कार्यरत हैं, रविवार की शाम शराब दुकान से लौट रहे थे। इसी दौरान सीपत थाने के पुलिसकर्मियों ने उन्हें रास्ते में रोक लिया और उनकी स्कूटी ज़ब्त कर थाने ले गए। पुलिस ने उन पर शराब पीकर वाहन चलाने का आरोप लगाते हुए कथित रूप से ₹50,000 की मांग की और पैसे न देने पर कड़ी कार्रवाई की धमकी दी।
लगातार धमकी और दबाव से परेशान धीरेंद्र मंज़ारे ने रास्ते में ज़हरीला पदार्थ खा लिया। उनकी पत्नी रामेश्वरी ने तत्काल उन्हें एनटीपीसी अस्पताल पहुँचाया, जहाँ से उन्हें अपोलो अस्पताल रेफर किया गया। उनकी हालत अभी गंभीर बताई जा रही है। धीरेंद्र ने पुलिस पर मानसिक प्रताड़ना और अवैध धन मांगने का गंभीर आरोप लगाया है।
इस घटना ने स्थानीय पुलिसिंग पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। पुलिस प्रशासन की ओर से अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

📝 दूसरा मामला — व्यापारी से 22 हज़ार रुपये की ऑनलाइन वसूली, फिर भी की कार्रवाई
ग्राम सीपत निवासी अविनाश सिंह ठाकुर, जो नवाडीह चौक में किराना दुकान संचालित करते हैं, ने थाना प्रभारी गोपाल सतपथी और पुलिसकर्मियों पर “कार्रवाई का डर दिखाकर ब्लैकमेलिंग और वसूली” का गंभीर आरोप लगाया है।
5 अक्टूबर 2025 (रविवार) को अविनाश ठाकुर अपने साथी रवि कश्यप के साथ किसी व्यक्तिगत कार्य से बुलेट बाइक (क्रमांक CG 04 AX 3880) में थाने पहुंचे थे। वहाँ थाना प्रभारी और एक आरक्षक ने उन्हें धारा 185 (नशे में वाहन चलाने) के तहत चालान की धमकी देते हुए ₹50,000 की मांग की। डर और दबाव में आकर व्यापारी ने ₹22,000 की राशि थाने के प्राइवेट कंप्यूटर ऑपरेटर राजेश्वर कश्यप के बैंक खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर कर दी।
इसके बावजूद थाना प्रभारी ने उनके खिलाफ धारा 185 में और उनके साथी के खिलाफ धारा 36(च) में कार्रवाई की। इतना ही नहीं, उसी रात लगभग 10 बजे पुलिस ने सुमित मेडिकल स्टोर के पास उनकी बाइक दोबारा जब्त कर थाने ले गई और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की बात कही।
अविनाश ठाकुर ने अपने आवेदन में स्पष्ट लिखा है कि पुलिसकर्मियों ने झूठे आरोप लगाकर उन पर अवैध वसूली के लिए दबाव बनाया और यह सब थाना प्रभारी गोपाल सतपथी तथा एएसआई सहेत्तर कुर्रे की मिलीभगत से किया गया। उन्होंने इस पूरे प्रकरण में ठोस बैंक ट्रांज़ैक्शन रसीद बतौर सबूत एसएसपी को सौंपी है।
📝 व्यापारी की गुहार और एसएसपी का रुख
अविनाश ठाकुर ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह को लिखित शिकायत देकर दोषी पुलिसकर्मियों पर भ्रष्टाचार व ब्लैकमेलिंग के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि न्याय नहीं मिला तो वे मामला उच्चाधिकारियों एवं मानवाधिकार आयोग तक ले जाएंगे।
एसएसपी रजनेश सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा —
“सीपत निवासी व्यापारी अविनाश ठाकुर से शिकायत प्राप्त हुई है। आवेदन के साथ ऑनलाइन भुगतान के ठोस सबूत संलग्न हैं। मामले की जांच प्रारंभ कर दी गई है और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।”
📝 जनता में गूंज और पुलिस पर सवाल
सीपत थाना क्षेत्र में यह मामला तेज़ी से चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि व्यापारी और एनटीपीसी कर्मचारी के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह आम जनता के बीच पुलिस पर से भरोसा हिला सकता है। लोग अब एसएसपी द्वारा की जा रही जांच और आगामी कार्रवाई पर निगाहें लगाए हुए हैं।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और ईमानदारी पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। यदि दोषियों पर शीघ्र एवं सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका असर जनता और पुलिस के आपसी विश्वास पर गहरा पड़ सकता है।
👉 सीपत थाने में उजागर हुआ यह ब्लैकमेलिंग और वसूली का मामला अब ज़िले में बड़ा भ्रष्टाचार प्रकरण बनता जा रहा है, जिसकी गूंज प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच सुनाई दे रही है।





