विश्व संस्कृति की जननी है आदिवासी परंपरा — करम पर्व पर उरांव समाज ने दिखाया समृद्ध सांस्कृतिक वैभव



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा *****/ कोरबा (झगरहा ग्राम), 8 अक्टूबर 2025।
कुडुख (उरांव) समाज द्वारा अपने आराध्य भगवान महादेव–पार्वती की उपासना एवं प्रकृति पूजन के प्रतीक करम पर्व का आयोजन परंपरागत उत्साह और भव्यता के साथ किया गया। इस पावन अवसर पर आदिवासी उरांव समाज के श्रद्धालुओं ने करम पेड़ की तीन डालों की स्थापना कर रात्रि भर पारंपरिक नृत्य–गान के साथ करम देव की आराधना की। यह पर्व भादो एकादशी के दिन अथवा दशहरा से दीपावली के मध्य मनाया जाता है, जो प्रकृति के प्रति आदिवासी समाज की गहरी आस्था और ईश्वर में अटूट विश्वास का प्रतीक है।
कुंवारी कन्याओं ने अपनी मनोकामना पूर्ति हेतु उपवास रखा तथा करम देव एवं भगवान शिव–पार्वती की उपासना की। यह पर्व अच्छाई के साथ चलने और बुराई से दूर रहने की प्रेरणा देता है।

✨ अतिथियों की गरिमामय उपस्थिति
कार्यक्रम में विश्व के प्रथम आदिवासी शक्तिपीठ कोरबा के संरक्षक श्री मोहन सिंह प्रधान, उपाध्यक्ष श्री निर्मल सिंह राज, तथा संगठन प्रमुख श्री रमेश सिरका विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से उरांव समाज के प्रतिनिधि, मातृशक्ति–पितृशक्ति और युवाशक्ति भारी संख्या में शामिल हुई।
कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों का मंच पर पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। तत्पश्चात पूजा–अर्चना के पश्चात मुख्य अतिथि श्री मोहन सिंह प्रधान ने अपने उद्बोधन में कहा कि —

“आदिवासी संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और पुरातन संस्कृति है। इस संस्कृति ने विश्व को एक नई व्यवस्था दी। दुर्भाग्य से स्वतंत्रता पूर्व और पश्चात भारतीय संविधान एवं देश की प्रगति में इस समाज को उसका उचित स्थान नहीं मिल पाया। आज भी आदिवासी समाज अपने हक और अधिकार के लिए संघर्षरत है।”
उन्होंने कहा कि आदिवासियों की परंपरा, संस्कृति और प्रकृति पूजा की विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान है, जिसे मिटाने की साजिशें चल रही हैं। समाज को सजग रहते हुए अपनी परंपराओं का सशक्त निर्वहन करना होगा। उन्होंने व्रती बहनों, बेटियों एवं उपस्थित जनसमुदाय को इस भव्य आयोजन की बधाई दी।
🪔 सांस्कृतिक एकता और संदेश
उपाध्यक्ष निर्मल सिंह राज ने अपने वक्तव्य में कहा कि आदिवासी समाज को वैचारिक रूप से मजबूत होकर धार्मिक व सांस्कृतिक आधार पर एकजुट रहना चाहिए। ओडिशा, झारखंड और मध्य प्रदेश से आए प्रतिनिधियों ने भी समाज की एकता और परंपरा की रक्षा का संदेश दिया।
कार्यक्रम का संचालन श्री नंदू भगत ने किया। आयोजन की सफलता में पूर्व समाज प्रमुख श्री सुभाष चंद्र भगत, श्री वासुदेव भगत तथा महिला पदाधिकारियों का विशेष सहयोग रहा। मांदर की थाप पर भगवान शिव–पार्वती की स्तुति के साथ रात्रि भर पारंपरिक नृत्य हुआ। यह क्षण पूरे समाज के लिए उल्लास और धार्मिक आस्था से परिपूर्ण रहा।
🙏 विशेष उपस्थिति
इस अवसर पर नगर पालिका निगम की महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत ने भी पहुँचकर करम देव की पूजा–अर्चना की तथा उपस्थित जनसमुदाय को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
अंत में कार्यक्रम में शामिल सभी अतिथियों के प्रति आभार श्री सुभाष चंद्र भगत द्वारा व्यक्त किया गया।
📍 स्थान : झगरहा ग्राम, कोरबा (छत्तीसगढ़)
✍️ प्रेषक — मोहन सिंह प्रधान
संरक्षक, विश्व का प्रथम आदिवासी शक्तिपीठ कोरबा


