कोरबा — विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल द्वारा आयोजित रैली में टाइगर राजा सिंह व अन्य नेता मौजूद रहेंगे; आयोजकों ने बड़े पैमाने पर उपस्थिति की अपील की, प्रशासन ने संयम व क़ानूनी प्रक्रिया का पालन करने का आग्रह किया।


त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ कोरबा, 21 सितंबर 2025 — विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) और बजरंग दल द्वारा आयोजित “हिन्दुत्व हुंकार” रैली आज कोरबा के ओपन थिएटर (घंटाघर मैदान) में आयोजित की जा रही है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता टाइगर राजा सिंह और मुख्य अतिथि गुरु खुशवंत साहेब होंगे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संघचालक सतेंद्र नाथ दुबे, प्रांत मंत्री विभूतिभूषण पांडेय तथा कार्यक्रम अध्यक्ष संतोष अग्रवाल भी मंच पर उपस्थित रहेंगे।
आयोजकों ने रैली के माध्यम से धर्मांतरण, लव जिहाद, लैंड जिहाद और गौ-तस्करी जैसे विषयों पर अपने विचार सार्वजनिक रूप से रखने का इरादा व्यक्त किया है। विश्व हिन्दू परिषद के जिला अध्यक्ष अमरजीत सिंह ने कहा, “हिन्दू समाज अब चुप नहीं बैठेगा” — यह बयान उन्होंने आयोजनों के उद्देश्यों का हवाला देते हुए दिया। बजरंग दल के जिला संयोजक राणा मुखर्जी ने भी आयोजनों में शामिल लोगों से समर्थन की अपील करते हुए कहा कि वे अपने विचार मंच से रखेंगे।
वहीं, विहिप के जिला सह मंत्री राज नारायण गुप्ता ने प्रत्येक हिन्दू परिवार से रैली में उपस्थिति बढ़ाने की अपील की है और बताया कि विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में लोग आने की संभावना है। आयोजक यह कहते रहे कि यह सभा उनके लिए अपनी बात सार्वजनिक रूप से कहने का मंच है।
प्रशासनिक तैयारियाँ: कोरबा पुलिस ने रैली के संदर्भ में सुरक्षा व्यवस्था एवं मार्ग-निर्देशों को चाकचौबंद किया है। थाना प्रभारी ने बताया कि सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल, धारा-निगरानी तथा यातायात प्रबंध किए गए हैं। उन्होंने आयोजकों व उपस्थित लोगों से संयम बरतने तथा किसी भी प्रकार की हिंसा या सार्वजनिक अव्यवस्था से परहेज़ करने की अपील की। प्रशासन ने यह भी कहा कि किसी भी आपत्तिजनक गतिविधि या गैर-कानूनी प्रयास के विरुद्ध कानूनन कार्रवाई की जाएगी।
नागरिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएँ: रैली की घोषणा के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों के बीच मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। कुछ लोग इसे अपने मत व विचार व्यक्त करने का अधिकार मानते हुए शामिल होने की बात कह रहे हैं, जबकि कुछ नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक शांति और अधिकारों के संरक्षण पर ध्यान देने की ज़रूरत बताई। कुछ सामाजिक संगठनों ने संवाद और कानूनी रास्ते अपनाने का आग्रह किया है और कहा कि किसी भी मुद्दे का समाधान संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से ही होना चाहिए।
कानूनी-सांस्कृतिक संदर्भ: धर्म, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक मुद्दों पर सार्वजनिक बहस संवैधानिक अधिकारों के दायरे में है, लेकिन साथ ही देश में ऐसा कोई भी संघटनात्मक या व्यक्तिगत कदम जो कानून का उल्लंघन करता हो या सामाजिक तनाव बढ़ाए, उस पर प्रशासन और न्यायालय की निगाह रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि शांतिपूर्ण सभा-प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है परंतु उसके साथ सार्वजनिक सुरक्षा और अन्य नागरिकों के अधिकारों का सम्मान भी आवश्यक है।
रैली के दौरान अधिकारियों ने जनता से शांति बनाए रखने, पुलिस और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने तथा किसी भी तरह की उकसावे वाली भाषा या हिंसा से दूर रहने का अनुरोध किया है। कार्यक्रम के बाद संभावित रूटीन यातायात प्रभावित हो सकते हैं; पुलिस ने आसपास के मार्गों के उपयोगकर्ताओं के लिए वैकल्पिक मार्ग सुझाए हैं।
निष्कर्षतः, कोरबा में आज होने वाला यह कार्यक्रम आयोजकों के अनुसार अपने विचारों को सार्वजनिक रूप से व्यक्त करने का एक मंच है, जबकि प्रशासन और नागरिक समाज ने सार्वजनिक व्यवस्था और संयम बरतने पर ज़ोर दिया है। रैली और उसके पश्चात की घटनाओं पर स्थानीय प्रशासन और मीडिया निगाह रखे हुए हैं

