April 21, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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ग्राम जवाली में शिवभक्ति का अलौकिक संगम – मातृ शक्तियों ने भोलेनाथ का जलाभिषेक कर मनाया स्थापना दिवस, भोजली पर्व की तैयारियों ने बढ़ाई रौनक

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा। सावन मास के तृतीय सोमवार को विकासखंड कटघोरा अंतर्गत ग्राम जवाली का वातावरण भक्ति और श्रद्धा से सराबोर हो गया। सुबह की पावन बेला में ग्राम की मातृ शक्तियों ने भगवान भोलेनाथ के मंदिर में बेलपत्र, धतूरा, पुष्प और जलाभिषेक कर विशेष पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर महिलाओं ने श्रीफल अर्पित कर परिवार, ग्राम और समाज की सुख-समृद्धि की मंगल कामना की।

1990 में शुरू हुई आस्था की यात्रा

सन् 1990 में ग्राम के किसान अंजोरसाय पटेल ने अपने पूर्वजों की भूमि, मुरई कछार खोलार नदी किनारे एक शिवलिंग स्थापित कर दैनिक जलाभिषेक का संकल्प लिया। समय के साथ यह स्थान आस्था का केंद्र बन गया। जब जवाली-सिंघाली पुल मार्ग का निर्माण हुआ तब छुरी के सेठ अग्रवाल (मारुति कंपनी) ने मंदिर निर्माण हेतु 21,000 रुपये का सहयोग दिया। तत्पश्चात 108 श्रद्धालु परिवारों के सामूहिक सहयोग से वर्ष 2014-15 में मंदिर का भव्य निर्माण पूर्ण हुआ।

11वीं स्थापना वर्षगांठ – दिनभर रहा भक्ति का माहौल

इस वर्ष मंदिर स्थापना के 11 वर्ष पूरे होने पर सोमवार को दिनभर मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। मातृ शक्तियों और ग्रामीण भक्तों ने विशेष पूजा कर प्रसाद वितरण का आयोजन किया।

प्रसाद वितरण में विशेष योगदान:

खीर प्रसाद – शिक्षिका बालन प्रजापति द्वारा अपने घर में बनाकर वितरित।

हलवा एवं सेवई – सीमा-दिलकुमार परिवार, राकेश्वरी-मालती-आराधना परिवार, राजकुमारी मैडम और मनोज साहू (शिवरीनारायण) का योगदान।

सामग्री – कन्हैया समिति कर्मचारी द्वारा उपलब्ध कराई गई।

प्रसाद निर्माण व वितरण में राजकुमार अग्रवाल, महिपाल, कान्हा जी, चीकी, मनोज पटेल, पुरुषोत्तम विधायक, रामायण सिंह, सीमा सहित अन्य ग्रामीणों का विशेष सहयोग रहा।

भोजली पर्व की तैयारियां शुरू

नागपंचमी से भोजली पर्व की तैयारियां भी प्रारंभ हो गई हैं। महिला मंडली के अनुसार नागपंचमी के दिन समीर कुंभकार के घर पर भोजली बोई जाएगी। रात्रि में भजन-कीर्तन का आयोजन होगा और रक्षाबंधन के अगले दिन रविवार को शोभायात्रा के साथ भोजली विसर्जन किया जाएगा। इस पारंपरिक पर्व को सफल बनाने में ग्रामवासी बढ़-चढ़कर सहयोग कर रहे हैं। भोजली पर्व छत्तीसगढ़ की एक प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा है, जो सखियों के बीच ‘भोजली मित्रता’ संबंध की शुरुआत का प्रतीक है।

ग्रामवासी रहे उपस्थित

इस अवसर पर पूर्व सरपंच संगीता कंवर, गिरजेश्वरी बलराम केंवट, कन्हैयालाल बैगा, रमेश, दिल कुमार, विश्राम सिंह, श्रीमती नामदेव, डॉली सारथी, उमा, सुमित्रा, दिल बाई, सुमित, रुचि द्विवेदी, सीमा रजक सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

ग्राम जवाली का शिव मंदिर आज पूरे क्षेत्र की आस्था का केंद्र बन चुका है, जहां हर सावन में भक्तों की भीड़ उमड़ती है और धार्मिक उत्सवों का आयोजन पूरे उत्साह से किया जाता है।

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