चेक बाउंस पड़ा भारी: कर्ज चुकाने से बचने वाले आरोपी को एक साल की जेल, डेढ़ लाख का जुर्माना



कोरबा न्यायालय का सख्त फैसला, बैंक का दावा हुआ साबित, दोषी करार दिए गए रमेश यादव
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// कोरबा, 03 जून 2026। चेक बाउंस के एक महत्वपूर्ण मामले में कोरबा न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को दोषी ठहराया है। माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कोरबा कु. कुमुदनी गर्ग की अदालत ने चेक अनादरण (बाउंस) प्रकरण में अभियुक्त रमेश यादव को दोषसिद्ध घोषित करते हुए एक वर्ष के सश्रम कारावास एवं ₹1.50 लाख के अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। न्यायालय के इस फैसले को बैंकिंग व्यवस्था में वित्तीय अनुशासन और चेक की विश्वसनीयता को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक द्वारा अभियुक्त के विरुद्ध परिवाद प्रकरण क्रमांक 293/2022 प्रस्तुत किया गया था। मामले में बैंक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष ठोस दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए।
न्यायालय में यह तथ्य प्रमाणित हुआ कि अभियुक्त रमेश यादव ने अपने ऋण खाते की देनदारी चुकाने के लिए ₹1,04,000 का चेक जारी किया था। जब उक्त चेक बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत किया गया तो खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण वह “फंड्स इनसफिशिएंट” टिप्पणी के साथ अनादरित हो गया। इसके बाद बैंक द्वारा विधिक नोटिस भेजकर भुगतान का अवसर दिया गया, लेकिन आरोपी ने निर्धारित समय सीमा में राशि जमा नहीं की।
निर्णय की कंडिका 13 में न्यायालय ने स्पष्ट रूप से माना कि आरोपी द्वारा ऋण दायित्व के निर्वहन के लिए चेक जारी किया गया था तथा उसका अनादरित होना आरोपी के वित्तीय दायित्व को स्थापित करता है। वहीं कंडिका 31 में न्यायालय ने कहा कि परिवादी बैंक द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज, अभिलेख और साक्ष्य इतने मजबूत हैं कि आरोपी के विरुद्ध मामला युक्तियुक्त संदेह से परे सिद्ध हो गया है।
सभी तथ्यों और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद माननीय न्यायालय ने आरोपी रमेश यादव को परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के सश्रम कारावास तथा ₹1,50,000 के अर्थदण्ड से दंडित किया। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि अर्थदण्ड की पूरी राशि परिवादी बैंक को प्रतिकर के रूप में प्रदान की जाएगी।
इसके अतिरिक्त न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी अर्थदण्ड की राशि जमा करने में असफल रहता है तो उसे अतिरिक्त तीन माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला उन लोगों के लिए कड़ा संदेश है जो आर्थिक दायित्वों से बचने के लिए चेक जारी कर भुगतान से मुकर जाते हैं। न्यायालय का यह निर्णय बैंकिंग प्रणाली में भरोसा बनाए रखने तथा वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


