“मग्गू सेठ की संदिग्ध संपत्तियों पर बढ़ी निगरानी, आपराधिक पृष्ठभूमि के चलते जांच की उठी मांग”




त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा रायगढ़, अप्रैल 2025। स्थानीय चर्चित कारोबारी विनोद अग्रवाल उर्फ मग्गू सेठ एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उनके खिलाफ लंबे समय से उठते रहे आपराधिक गतिविधियों और संपत्ति अर्जन के तरीकों को लेकर अब जांच की मांग तेज हो रही है। बताया जा रहा है कि उनकी कई संपत्तियों की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारों के अनुसार, इन संपत्तियों को “Proceeds of Crime” माना जा सकता है, और इन पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत कार्रवाई संभव है।
क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2009 से 2024 के बीच मग्गू सेठ पर हत्या, जबरन वसूली, जमीन हड़पना जैसे कई संगीन अपराधों के आरोप लगे हैं। इसके बावजूद वे रियल एस्टेट, ट्रांसपोर्ट, क्रेशर उद्योग जैसे व्यवसायों में लगातार विस्तार करते रहे हैं।
विशेषकर आदिवासी समुदाय, विशेष रूप से पहाड़ी कोरवा समाज की जमीनों को कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से हड़पने के मामलों ने स्थानीय जनमानस को झकझोर कर रख दिया है। यह आरोप लगाया जा रहा है कि शक्तिशाली पहुँच का लाभ उठाकर उन्होंने “कानून के भीतर रहते हुए” अवैध कब्जों को अंजाम दिया।
कानून क्या कहता है?
PMLA, 2002 के अनुसार, कोई भी संपत्ति जो किसी आपराधिक गतिविधि से अर्जित की गई हो, उसे Proceeds of Crime कहा जाता है।
इसके अलावा, बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम, 1988 के तहत भी ऐसी संपत्तियों पर कार्रवाई की जा सकती है, जो वास्तविक मालिक के नाम पर न होकर किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत हों।
शक की मुख्य वजहें:
- लंबा आपराधिक इतिहास – 15 वर्षों से संगीन मामलों में आरोपित होना, परंतु घोषित आय का अभाव।
- जमीन पर कब्जे के आरोप – विशेष रूप से आदिवासी समाज की भूमि पर संदिग्ध तरीके से रजिस्ट्री कराने के प्रकरण।
- संपत्ति विस्तार की गति – अचानक बढ़ती संपत्तियाँ, कंपनियाँ, और कारोबार, जिनकी पूंजी का स्रोत स्पष्ट नहीं।
संभावित कानूनी कार्रवाई:
- ED द्वारा संपत्ति अटैच करना – यदि इन्हें अपराध से अर्जित माना गया।
- आयकर विभाग की जांच – घोषित और वास्तविक आय में अंतर की पड़ताल।
- PMLA के तहत मामला दर्ज – यदि अन्य FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की पुष्टि हो।
- बेनामी संपत्तियों पर जब्ती की कार्रवाई – यदि संपत्तियाँ फर्जी नामों पर पाई जाती हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया:
रायगढ़ क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा,
“यह मामला केवल एक व्यक्ति की संपत्ति से नहीं जुड़ा है, बल्कि यह सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही से भी संबंधित है।”
निष्कर्ष:
भले ही अभी तक आधिकारिक रूप से कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार संबंधित एजेंसियां प्रकरण की प्रारंभिक जांच में जुटी हैं। यदि जांच शुरू होती है, तो यह न केवल इस मामले में, बल्कि भविष्य में अवैध संपत्ति अर्जन के मामलों में एक मजबूत कानूनी मिसाल साबित हो सकती है।




