सतनामी समाज के स्वाभिमान की शताब्दी का ऐतिहासिक उत्सव — 100 वर्ष पूर्ण होने पर अखिल भारतीय सतनामी महासभा की भव्य ‘सतनामी स्वाभिमान–सम्मान शताब्दी यात्रा’ संपन्न






त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ***// बिलासपुर/जांजगीर–शक्ति।
अखिल भारतीय सतनामी महासभा की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के गौरवपूर्ण अवसर पर महंत बाड़ा, बिलासपुर के राजमहंतों के नेतृत्व में ‘सतनामी स्वाभिमान–सम्मान शताब्दी यात्रा’ का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन किया गया। यह यात्रा सतनामी समाज के संस्थापक जगत गुरु गोसाई अगम दास जी तथा उनके महान अनुयायी राजमहंतों — राजमहंत नैन दास महिलांग गौ, भक्त राजमहंत जुगतूराम सोनवानी, मालगुजार राजमहंत रतिराम कौशले, राजमहंत अंजोर दास कोशले, राजमहंत रनसाय कोसरिया सहित अन्य महंतजनों के अतुलनीय सामाजिक, धार्मिक और ऐतिहासिक योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से निकाली गई।

उल्लेखनीय है कि अखिल भारतीय सतनामी महासभा का गठन वर्ष 1924–25 में सतनामी समाज की सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, शैक्षणिक एवं राजनीतिक स्थिति को सुदृढ़ कर समाज को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार दिलाने के लिए किया गया था। इसी उद्देश्य के अंतर्गत मध्यप्रदेश क्षेत्र में 108 राजमहंतों एवं जिला महंतों की नियुक्ति कर सामाजिक व्यवस्था का संचालन गुरु, महंत, भंडारी, छड़ीदार एवं अथगवा कमेटी के माध्यम से किया जाता रहा।
इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज है कि वर्ष 1914–15 में गौ माता की सेवा और गौ-हत्या रोकने हेतु करमनडीह, ढाबाडीह एवं नागपुर में ब्रिटिश सरकार द्वारा संचालित बूचड़खानों के विरुद्ध संघर्ष कर उन्हें बंद कराया गया। वहीं वर्ष 1925–26 में सी.पी. बरार, नागपुर में पिटीशन दायर कर सतनामी समाज को सम्मान और स्वाभिमान के साथ जीवन जीने के अधिकार दिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया गया। शताब्दी यात्रा के दौरान इन्हीं महान संघर्षों और बलिदानों को स्मरण कर समाज को एकजुटता, जागरूकता और आत्मगौरव का संदेश दिया गया।
29 दिसंबर को यह शताब्दी यात्रा ग्राम मुक्ता राजा से प्रारंभ होकर ठठारी, जैजेपुर, तुषार, हसौद, छपोरा, सीपत, मालखरौद होते हुए पीहरिद में रात्रि विश्राम के पश्चात नगझर, गोबरा-डभरा, ज्वाली, किरारी होते हुए राजमहंत सुंदरसाय बंजारे के ग्राम बघोद में भव्य समापन के साथ संपन्न हुई। यात्रा के दौरान गांव–गांव में सतनामी समाज के लोगों ने पुष्पवर्षा, स्वागत और श्रद्धा भाव से यात्रा का अभिनंदन किया।
इस ऐतिहासिक यात्रा में प्रमुख रूप से वरिष्ठ राजमहंत दसेराम खांडे, राजमहंत राजेश्वर भार्गव, राजमहंत प्यारेलाल कोसरिया, राजमहंत जे.पी. कोशले, राजमहंत सुंदरसाय बंजारे, राजमहंत सुन्दर लाल सोनवानी, जिला महंत गछराम राम बघेल, राजमहंत राजनारायण निराला सहित अनेक राजमहंत एवं जिला महंतगण उपस्थित रहे। साथ ही धनसाय बंजारे, गंगाराम लहरे, दीवानदास खडकदास, झरन प्रेमदास, खड़बदन कुर्रे, रतन सिंह, गोविन्द, किशोर, दूजेराम, मैनेजर, राधेश्याम, गज्जू, अजय भारद्वाज, भागीरथी बंजारे, रेशलाल कुर्रे (जिला अध्यक्ष, सतनामी समाज) सहित समाज के सैकड़ों कार्यकर्ता, मातृशक्ति एवं युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए।
कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष कमल किशोर पटेल, सरपंच पीतांबर पटेल, संत ऋतुदास, धर्मसिंह बर्मन, दिनेश पटेल, भूपेन पटेल, शैलेन्द्र बंजारे, घासीराम अग्रवाल, भवन पटेल, नवल पटेल, कलाकार, साहित्यकार एवं सामाजिक पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
समापन समारोह में आयोजित सभा को राजमहंत दसेराम खांडे, राजमहंत राजेश्वर भार्गव, राजमहंत जे.पी. कोशले एवं राजमहंत प्यारेलाल कोसरिया ने संबोधित करते हुए सतनामी समाज को संगठित होकर शिक्षा, सामाजिक चेतना और अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में राजमहंत सुंदरसाय बंजारे ने आभार व्यक्त किया, जबकि लंबोदर भारद्वाज ने कार्यक्रम का सफल एवं सुव्यवस्थित संचालन किया।
यह शताब्दी यात्रा न केवल इतिहास का स्मरण थी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वाभिमान, एकता और सामाजिक जागरण का सशक्त संदेश बनकर उभरी।





