फोगला आश्रम, श्रीधाम वृंदावन में श्रीमद्भागवत कथा का प्रथम पाठ संपन्न — कथा व्यास श्रीहित ललितवल्लभ नागर जी की अमृतवाणी से जागृत हुआ भक्ति-चेतना का महासागर, रात्रि 10:30 बजे राधा नाम संकीर्तन में झूमा वृंदावन







त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//**/ वृंदावन धाम।
श्रीधाम वृंदावन स्थित पावन फोगला आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ प्रथम दिवस अत्यंत भावविभोर, दिव्य और भक्तिरस से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। सायं 3:00 बजे जैसे ही श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रथम पाठ का आरंभ हुआ, आश्रम परिसर श्रद्धा, शांति और भक्ति की अलौकिक अनुभूति से सराबोर हो उठा।

कथा व्यास परम पूज्य श्रीहित ललितवल्लभ नागर जी महाराज ने प्रथम पाठ के माध्यम से श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा, उसके आध्यात्मिक संदेश और मानव जीवन में उसकी उपयोगिता को अत्यंत सरल, सरस और हृदयस्पर्शी शब्दों में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि भागवत कथा केवल एक ग्रंथ का पाठ नहीं, बल्कि यह आत्मशुद्धि, वैराग्य, भक्ति और प्रभु-प्रेम की अनुभूति का जीवंत मार्ग है।
महाराज श्री की मधुर वाणी, गहन भाव और ओजस्वी शैली ने श्रोताओं को मानो सांसारिक बंधनों से मुक्त कर प्रभु चरणों में लीन कर दिया। प्रथम पाठ के दौरान उपस्थित श्रद्धालु शांत चित्त से कथा श्रवण करते हुए भाव-विभोर होते रहे और पूरा वातावरण “राधे-राधे” की अनुभूति से गूंजता रहा।
कथा से पूर्व विधिविधान से संपन्न पोती पूजन एवं वैदिक मंत्रोच्चार ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इसके पश्चात निकली भव्य कलश यात्रा ने पूरे आश्रम और आसपास के क्षेत्र को भक्तिरस में डुबो दिया। सिर पर मंगल कलश धारण कर, हरि नाम और राधे-राधे के जयघोष के साथ चलते भक्तजन ब्रजभूमि की परंपराओं को जीवंत करते नजर आए।

रात्रि 10:30 बजे राधा नाम संकीर्तन — भक्ति, उल्लास और नववर्ष का दिव्य संगम
प्रथम दिवस का समापन रात्रि 10:30 बजे आयोजित राधा नाम संकीर्तन से हुआ, जिसने पूरे वृंदावन धाम को आनंद और उल्लास से भर दिया। जैसे ही राधे-राधे की जबरदस्त धुन बजी, वैसे ही युवा, वृद्ध, महिलाएं और बच्चे — सभी भक्तजन भाव-विभोर होकर भक्ति-नृत्य में लीन हो गए। ढोलक, मृदंग, हारमोनियम और करताल की मधुर ध्वनि के साथ गूंजते राधा नाम ने वातावरण को ऐसा भक्तिमय बना दिया कि अंग्रेजी नववर्ष की विदाई और नववर्ष का स्वागत पूरी तरह भक्ति-भाव में परिवर्तित हो गया।
संकीर्तन के दौरान ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं श्रीराधा रानी की कृपा से वृंदावन धाम सजीव हो उठा हो। पूरी रात्रि भजन, कीर्तन और नाम-स्मरण में बीत गई। श्रद्धालुओं ने नववर्ष के अवसर पर प्रभु से सुख, शांति, सद्बुद्धि और निष्काम भक्ति की कामना की।

फोगला आश्रम में चल रही यह श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, भक्ति परंपरा और ब्रज की आध्यात्मिक चेतना का जीवंत उत्सव बनकर उभर रही है। निश्चित ही कथा व्यास श्रीहित ललितवल्लभ नागर जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित यह कथा श्रद्धालुओं के हृदय में लंबे समय तक अमिट स्मृति के रूप में अंकित रहेगी।
राधे-राधे। 🌸🙏





