कांग्रेस में ‘दरबारी राजनीति’ का बोलबाला — सोनिया सेवा से तय होता है राज्यसभा टिकट : भाजपा का तीखा हमला


पवन खेड़ा के नाम पर मचे बखेड़े ने उजागर की कांग्रेस की अंदरूनी कलह, देवलाल ठाकुर बोले—योग्यता नहीं, चापलूसी है असली पैमाना
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने कांग्रेस द्वारा राज्यसभा प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि कांग्रेस में अब योग्यता, अनुभव या प्रदेश के हित नहीं बल्कि केवल ‘दरबारी संस्कृति’ और ‘सोनिया-सेवा’ ही टिकट का असली पैमाना बन गया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर मचे विवाद ने कांग्रेस के अंदर गहराती गुटबाजी और नेतृत्व के राजनीतिक खोखलेपन को पूरी तरह उजागर कर दिया है।
प्रदेश प्रवक्ता ठाकुर ने कहा कि पहले कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व पवन खेड़ा को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाने की तैयारी में था, लेकिन जैसे ही ‘स्थानीय बनाम बाहरी’ का विवाद खड़ा हुआ, पार्टी के भीतर अफरा-तफरी मच गई और अंततः कांग्रेस नेतृत्व को अपना निर्णय बदलना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस में आंतरिक सिर-फुटौवल की स्थिति चरम पर पहुंच चुकी है।
ठाकुर ने तंज कसते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता ने देखा कि किस तरह पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने दिल्ली दरबार में जोरदार लॉबिंग की, लेकिन इसके बावजूद उनके सारे प्रयास धरे के धरे रह गए। उन्होंने कहा कि बघेल और बैज के ‘दिल के अरमां’ आखिरकार पूरे नहीं हो सके और पार्टी के अंदर की राजनीति ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रहते हुए भूपेश बघेल ने गांधी परिवार को खुश करने के लिए सड़कों पर गुलाब के फूल तक बिछाए थे, लेकिन आज वही ‘गुलाब वाली भक्ति’ भी काम नहीं आई। उन्होंने कहा कि अंततः फूलोदेवी नेताम की ‘सोनिया-सेवा’ भारी पड़ गई और कांग्रेस में यही साबित हुआ कि योग्यता नहीं बल्कि गांधी परिवार की चापलूसी ही टिकट दिलाने का सबसे बड़ा आधार है।
देवलाल ठाकुर ने कहा कि पवन खेड़ा के नाम पर जो ‘बखेड़ा’ खड़ा हुआ, उसने कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चल रहे असंतोष और गुटबाजी को खुलकर सामने ला दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के लिए छत्तीसगढ़ हमेशा से केवल एक राजनीतिक एटीएम की तरह रहा है। जब भी प्रतिनिधित्व की बात आती है, तो यह पार्टी स्थानीय नेतृत्व को दरकिनार कर बाहरी चेहरों या दरबारियों को प्राथमिकता देती रही है।
उन्होंने कहा कि इस बार भी कांग्रेस नेतृत्व की मंशा कुछ ऐसी ही थी, लेकिन पार्टी के भीतर उठे विरोध और विवाद के कारण उनकी रणनीति सफल नहीं हो पाई। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस की यह अंतर्कलह आने वाले समय में और बड़ा राजनीतिक बखेड़ा खड़ा करेगी।
ठाकुर ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा छत्तीसगढ़िया अस्मिता, स्थानीय नेतृत्व और प्रदेश के हितों को सर्वोपरि मानती है। जबकि कांग्रेस में टिकट का फैसला जनता की अपेक्षाओं के आधार पर नहीं, बल्कि दिल्ली दरबार में होने वाली लॉबिंग और दरबारी राजनीति के आधार पर किया जाता है।


