त्रिदोष संतुलन से निरोगी जीवन का मंत्र: महिला पतंजलि योग समिति के प्रांतीय सह योग शिक्षक प्रशिक्षण शिविर में आयुर्वेदिक जागरूकता कार्यक्रम






त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****// कोरबा/छत्तीसगढ़।
महिला पतंजलि योग समिति छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित वर्चुअल ऑन-लाइन 25 दिवसीय 100 घंटे के प्रांतीय सह योग शिक्षक प्रशिक्षण शिविर-3 के अंतर्गत त्रिदोष और हमारी प्रकृति से सुस्वास्थ्य विषय पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों के अनुसार स्वस्थ और निरोगी जीवन जीने के उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।
इस अवसर पर पतंजलि योगपीठ हरिद्वार, उत्तराखंड के आजीवन सदस्य, सुप्रसिद्ध आयुर्वेद चिकित्सा विशेषज्ञ एवं नाड़ीवैद्य डॉ. नागेन्द्र नारायण शर्मा ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि वात-पित्त-कफ—इन तीनों त्रिदोषों का संतुलन ही उत्तम स्वास्थ्य का आधार है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक प्रकृति त्रिदोषों के अनुपात पर आधारित होती है, जिसे पहचानकर यदि उसी के अनुरूप आहार-विहार अपनाया जाए, तो अधिकांश रोगों से बचा जा सकता है।
डॉ. नागेन्द्र शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “प्रकृति अनुसार आहार-विहार न करना ही रोगोत्पत्ति का मूल कारण है”। उन्होंने प्रतिभागियों को अपनी प्रकृति का निर्धारण करने की सरल विधियाँ बताईं तथा दैनिक जीवन में सात्त्विक भोजन, नियमित योग-प्राणायाम, संतुलित दिनचर्या और सकारात्मक सोच अपनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि त्रिदोषों को संतुलित रखकर ही मनुष्य दीर्घकाल तक निरोगी एवं ऊर्जावान रह सकता है।
इस 25 दिवसीय 100 घंटे के वर्चुअल प्रांतीय सह योग शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम में महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड सहित 11 जिलों से 118 महिला प्रतिभागी सहभागिता कर रही हैं। यह प्रशिक्षण महिला पतंजलि योग समिति छत्तीसगढ़ की राज्य प्रभारी सुश्री जया मिश्रा, राज्य सोशल मीडिया प्रभारी श्रीमती गीतांजलि पटनायक तथा राज्य कार्यकारिणी सदस्य श्रीमती हेमलता साहू के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है।
कार्यक्रम में महिला पतंजलि योग समिति छत्तीसगढ़ की राज्य कार्यकारिणी सदस्य हेमलता साहू, कोरबा जिला सोशल मीडिया प्रभारी विन्द्रा चौहान, योग शिक्षिका चंद्रबाला शुक्ला सहित प्रशिक्षार्थी विद्या, सुरेखा, श्वेता, उषा, कल्पलता, रानी, किरण, बबली, रितु, नीशू एवं प्रमिला कुमारी सहित पूरे छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में माताएं-बहनें विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने कहा कि योग और आयुर्वेद के समन्वय से न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि समाज में स्वास्थ्य जागरूकता भी बढ़ती है। महिला पतंजलि योग समिति द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण शिविर महिलाओं को आत्मनिर्भर, स्वास्थ्य-सचेत और योग के माध्यम से समाज सेवा के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।





