March 13, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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छत्तीसगढ़ से वृन्दावन की ओर उमड़ा भक्ति का सैलाब 🌸 कोरबा–बिलासपुर–भाटापारा–रायपुर से सैकड़ों रसिक भक्त ट्रेन से हुए रवाना, श्रीप्रियावल्लभ लालजी महाराज के पाटोत्सव एवं खिचड़ी महोत्सव में होंगे सहभागी

 

 त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//  वृन्दावन/छत्तीसगढ़।
सनातन परंपरा, भक्ति और रस से सराबोर वृन्दावन धाम में आयोजित हो रहे श्रीप्रियावल्लभ लालजी महाराज के द्वादश दिवसीय पाटोत्सव एवं एक माह के खिचड़ी महोत्सव को लेकर छत्तीसगढ़ के भक्तों में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में कोरबा, बिलासपुर, भाटापारा एवं रायपुर से सैकड़ों की संख्या में रसिक भक्तों का जत्था भजन–कीर्तन करते हुए ट्रेन द्वारा वृन्दावन धाम के लिए रवाना हुआ।
रेल यात्रा के दौरान पूरे वातावरण में “जय जय श्री हित हरिवंश”, “श्रीजी की जय” और हरिवंश नाम संकीर्तन की मधुर ध्वनि गूंजती रही। भक्तों ने बताया कि यह केवल यात्रा नहीं, बल्कि प्रभु प्रेम में डूबा हुआ एक चलता-फिरता उत्सव है, जहाँ हर डिब्बा सत्संग, भजन और हरिनाम से पावन हो उठा।

 

 

भक्तों का यह विशाल दल श्रीप्रियावल्लभ कुंज, वृन्दावन में आचार्य विष्णुमोहन नागार्च जी के पावन सान्निध्य में आयोजित 20 दिसंबर 2025 से 20 जनवरी 2026 तक चलने वाले खिचड़ी महोत्सव तथा 31 दिसंबर 2025 से 11 जनवरी 2026 तक मनाए जाने वाले द्वादश दिवसीय पाटोत्सव में सहभागिता करेगा। इस दौरान प्रतिदिन प्रभु को विशेष खिचड़ी भोग अर्पित किया जाएगा, वहीं पाटोत्सव के अंतर्गत ध्वजारोहण, अखंड हरिवंश नाम संकीर्तन, हितवाणी पाठ, समाज गायन, विद्वत संगोष्ठी, श्रीजी का अभिषेक, नवीन पोशाक एवं दिव्य श्रृंगार तथा संत–वैष्णव भंडारे जैसे भव्य आयोजन संपन्न होंगे।

 

 

इसी क्रम में 31 दिसंबर 2025 से 6 जनवरी 2026 तक फोगला आश्रम, रमणरेती, वृन्दावन में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा भी भक्तों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगी, जहाँ 151 श्रीमद्भागवत जी के मूलपाठ के साथ श्रीहित ललित वल्लभ नागार्च जी के श्रीमुख से सरस, भावपूर्ण एवं रसपूर्ण कथा का श्रवण लाभ भक्तों को प्राप्त होगा।
इसके अतिरिक्त वंशीवट एवं भांडीरवन में ब्याहुला महोत्सव तथा श्री गोवर्धन महाराज की तलहटी में छप्पन भोग का दिव्य दर्शन जैसे विशेष धार्मिक आयोजनों को लेकर भी छत्तीसगढ़ के भक्तों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। यात्रियों ने बताया कि इस यात्रा का उद्देश्य केवल दर्शन नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और सनातन संस्कृति से आत्मिक जुड़ाव है।
भक्तों ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पावन भूमि से निकली यह यात्रा वृन्दावन की गलियों में पहुंचकर भक्ति का नया अध्याय रचेगी। आयोजकों ने भी सभी रसिक भक्तों से इस महामहोत्सव में सहभागी बनकर तन–मन–धन से सेवा कर धर्म लाभ अर्जित करने का आह्वान किया है।
अंत में भक्तों ने कामना की कि श्रीप्रियावल्लभ लालजी महाराज की कृपा छत्तीसगढ़ सहित समस्त देश–प्रदेश पर बनी रहे और यह आध्यात्मिक यात्रा सभी के जीवन में भक्ति, शांति और सद्भाव का संचार करे।
🌸 जय जय श्री हित हरिवंश! श्रीजी की जय! 🌸

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