February 11, 2026

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हर बच्चे के स्वस्थ भविष्य के लिए बालको की पहल — ‘पोषण माह 2025’ में 40 गांवों तक पहुँची जागरूकता की किरण, 14 हजार बच्चों को मिलेगा लाभ

 

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****बालकोनगर, 12 नवंबर 2025
वेदांता समूह की प्रमुख इकाई भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने ‘पोषण माह 2025’ के अवसर पर कोरबा जिले में विस्तृत पोषण जागरूकता अभियान चलाया, जिसके तहत महिलाओं, बच्चों और समुदाय के लोगों को स्वास्थ्य और पोषण के महत्व के प्रति प्रेरित किया गया।
यह पहल भारत सरकार के “पोषण अभियान” के अंतर्गत आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाना और समाज में संतुलित पोषण की संस्कृति को बढ़ावा देना है।
इस वर्ष बालको ने अपने ‘प्रोजेक्ट आरोग्य’ और ‘नंद घर’ कार्यक्रमों के माध्यम से “हर बच्चे के लिए स्वस्थ भविष्य” विषय पर अनेक जनजागरूकता गतिविधियाँ आयोजित कीं।
40 गांवों और 33 नंद घरों तक पहुँचा पोषण संदेश
बालको द्वारा संचालित इस अभियान के तहत 40 गांवों और 33 नंद घरों में 250 से अधिक परिवारों को शामिल किया गया।
माताओं को बच्चों के सही खानपान, संतुलित आहार, स्तनपान के महत्व और पोषण संबंधी प्रमुख बिंदुओं की जानकारी दी गई।
कार्यक्रमों में टेक होम राशन (THR) और पॉजिटिव डिविएंस हर्थ (PD Harth) सत्रों के माध्यम से स्थानीय खाद्य सामग्री से पौष्टिक भोजन बनाने की विधियाँ सिखाई गईं।
गीतों, समूह चर्चाओं, प्रतियोगिताओं और घर-घर प्रदर्शन के माध्यम से संदेशों को जन-जन तक पहुँचाया गया, जिससे महिलाओं में विशेष रूप से स्वास्थ्य जागरूकता और पोषण के प्रति आत्मनिर्भरता बढ़ी।
‘शिशु संजीवनी पैक’ — बच्चों के लिए पौष्टिक रेडी-टू-ईट आहार
बालको ने बाल स्वास्थ्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और सशक्त करते हुए ‘शिशु संजीवनी पैक’ नामक विशेष रेडी-टू-ईट पौष्टिक आहार लॉन्च किया।
प्रत्येक 40 ग्राम पैक में लगभग 200 कैलोरी ऊर्जा और आवश्यक प्रोटीन मौजूद है। यह पैक आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों को प्रदान किया जाएगा।
यह पहल वेदांता समूह के ‘रन फॉर ज़ीरो हंगर’ अभियान का हिस्सा है, जिसे सोशल रिवाइवल ग्रुप ऑफ अर्बन रूरल एंड ट्राइबल (श्रोत) के सहयोग से लागू किया जा रहा है।
इससे बालको समर्थित 262 नंद घरों के माध्यम से लगभग 14,000 बच्चों को सीधा लाभ मिलेगा — यह अपने आप में एक ऐतिहासिक कदम है जो बाल पोषण में सुधार की दिशा में नया अध्याय लिखेगा।
‘खिलते फूल मॉड्यूल’ से प्रारंभिक बाल विकास को मिलेगा बल
बालको ने इस अवसर पर ‘खिलते फूल मॉड्यूल’ भी शुरू किया, जो 0 से 3 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के अभिभावकों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शिका है।
यह मॉड्यूल बच्चों के प्रारंभिक मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक विकास पर केंद्रित है, जिससे माता-पिता को बच्चों की समग्र वृद्धि के लिए सही दिशा मिलती है।
उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मान और प्रोत्साहन
अभियान के दौरान चैंपियन मदर, सर्वश्रेष्ठ नंद घर (उपस्थिति के आधार पर), सर्वश्रेष्ठ किचन गार्डन, सर्वश्रेष्ठ पोषण बाड़ी और सक्रियतम आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जैसी श्रेणियों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया गया।
इन पुरस्कारों ने समुदाय में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और सकारात्मक बदलाव को बढ़ावा दिया।
सीईओ राजेश कुमार बोले — “कोई भी बच्चा पोषण से वंचित न रहे, यही हमारा संकल्प”
बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री राजेश कुमार ने कहा कि “हर बच्चे के विकास में अच्छा पोषण सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बालको का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा स्वास्थ्य और पोषण के अवसर से वंचित न रहे।”
उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट आरोग्य और नंद घर जैसी पहलें समाज में जागरूकता बढ़ाने, परिवारों को सशक्त बनाने और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में ठोस कदम हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि “हम चाहते हैं कि हर बच्चा स्वस्थ, शिक्षित और आत्मविश्वासी बनकर आगे बढ़े — यही सच्चे विकास का प्रतीक है।”
महिलाओं के अनुभवों में झलका बदलाव
बेलगरी बस्ती की निवासी अकांक्षा साहू ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि,
“पहले मुझे लगा कि घर का सामान्य खाना बच्चों के लिए पर्याप्त है, लेकिन पीडी हर्थ सत्र में जाकर समझ आया कि बच्चों को विशेष पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। वहाँ सिखाई गई रेसिपी बहुत आसान थीं और स्थानीय सामग्री से पौष्टिक खाना बनाने में मदद मिली। इन तरीकों को अपनाने से मेरे बच्चे की सेहत और ताकत दोनों में सुधार हुआ है।”
बालको का सतत प्रयास — स्वस्थ समाज की दिशा में मजबूत कदम
‘पोषण माह 2025’ के माध्यम से बालको ने यह संदेश दिया कि स्वस्थ समाज की नींव पोषित बचपन से ही रखी जाती है।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाना, समुदाय को जोड़ना और हर परिवार तक संतुलित आहार का महत्व पहुँचाना ही इस अभियान का मूल उद्देश्य रहा।
बालको ने अपने इस प्रयास से कोरबा ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य जागरूकता और सामुदायिक विकास की मिसाल कायम की है।

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