✨ भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा की अमर मित्रता कथा ने दिया सच्चे दान और भक्ति का संदेश — सप्तम दिवस की कथा में उमड़ा श्रद्धा और आस्था का सागर ✨



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ***/ कोरबा। सर्वमंगला नगर, दुरपा में पटेल परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के सप्तम दिवस पर राष्ट्रीय भगवताचार्य श्री रमाकांत जी महाराज (हरदीबाजार) ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की अनोखी मित्रता कथा का अद्भुत वर्णन किया। कथा श्रवण के दौरान उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
महाराज श्री ने कहा कि —
“जीवन से दरिद्रता को दूर करना है तो सच्चे मन से तांदुल (चावल) का दान अवश्य करें।”
उन्होंने बताया कि सुदामा जी ने जब तीन मुट्ठी तांदुल लेकर अपने मित्र श्रीकृष्ण को भेंट किए, तो भगवान ने सुदामा की निश्छल भक्ति और प्रेम देखकर दो मुट्ठी चावल खाकर उन्हें तीनों लोक का ऐश्वर्य प्रदान कर दिया। यह कथा दान, समर्पण और सच्ची मित्रता का सर्वोच्च उदाहरण है।
महाराज जी ने कहा कि दान केवल वस्तु देने का नाम नहीं, बल्कि भाव देने का कार्य है। यदि हम निस्वार्थ भाव से ईश्वर के प्रति श्रद्धा रखकर दान करें, तो न केवल दरिद्रता बल्कि जीवन की तमाम नकारात्मकताएं भी दूर हो जाती हैं।
उन्होंने कहा कि आज के युग में भी यदि व्यक्ति सुदामा जैसा सच्चा भाव रखे और श्रीकृष्ण जैसा विश्वास रखे, तो जीवन में कोई कमी नहीं रहती।
कथा स्थल पर भक्तों की भीड़ ने उत्साहपूर्वक “राधे-कृष्ण” के जयघोष किए और वातावरण भक्तिमय हो उठा।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने महाराज श्री के प्रवचन का श्रवण किया और सच्चे दान, मित्रता और भक्ति के इस अनुपम संदेश को आत्मसात किया।
📍 स्थान: सर्वमंगला नगर, दुरपा, कोरबा
📅 आयोजक: पटेल परिवार
🪔 कथावाचक: राष्ट्रीय भगवताचार्य श्री रमाकांत जी महाराज (हरदीबाजार)
🌾 मुख्य संदेश: “जीवन से दरिद्रता दूर करनी है तो तांदुल का दान अवश्य करें।”


