राज्योत्सव में संदीप शर्मा की सुरमयी प्रस्तुति से गूंजा कोरबा, श्रोताओं ने दी वाहवाही






त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित राज्योत्सव 2025 के अवसर पर कोरबा के प्रतिभाशाली गायक संदीप शर्मा ने अपनी मनमोहक गायकी से समूचे कार्यक्रम स्थल को संगीत के रंग में रंग दिया। उनके साथ मंच साझा करते हुए कलाकार मोना जायसवाल और बिंदु तिवारी ने भी शानदार संगत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
2 नवंबर से 4 नवंबर तक घंटाघर कोरबा में आयोजित इस राज्योत्सव में दिलीप शडंगी, अलका चंद्राकर और राहुल सिंह जैसे विख्यात कलाकारों ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपरा और संगीत की सुंदर झलक प्रस्तुत की। इन्हीं के बीच संदीप शर्मा की प्रस्तुतियों ने विशेष रूप से दर्शकों का दिल जीत लिया।
संदीप शर्मा ने मंच पर सबसे पहले “जरी की पगड़ी बांधे सुंदर आंखों वाला भजन” प्रस्तुत कर भक्ति का माहौल बना दिया। इसके बाद उन्होंने फिल्म साजन का मशहूर ग़ज़ल “जिए तो जिए कैसे बिन आपके” गाकर दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

इसके उपरांत उन्होंने छत्तीसगढ़ी गीत “मिठ मिठ लागे माया के बानी” और फ़िल्मी गीत “सारा ज़माना हसीनों का दीवाना” की शानदार प्रस्तुति दी। दर्शकों की मांग पर एक बार फिर मंच पर लौटकर उन्होंने भजन “मेरे झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे राम आएंगे” प्रस्तुत किया, जिसने श्रद्धा और आनंद दोनों का संगम रच दिया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में संदीप ने मशहूर ग़ज़ल “चांदी जैसा रंग है तेरा, सोने जैसे बाल” और लोकप्रिय गीत “आजा सनम मधुर चांदनी में हम” से समूचे वातावरण को सुरों से सराबोर कर दिया।
संदीप शर्मा कोरबा जिले के ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने पाली महोत्सव (कोरबा), बैरिस्टर छेदीलाल महोत्सव (जांजगीर), बिलासपुर, रायपुर, भिलाई, उत्तरप्रदेश, बिहार और गोवा सहित अनेक स्थानों पर अपने सुरों की जादूगरी दिखाई है।
संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें कोलकाता में आयोजित राष्ट्रीय भजन प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार और मलेशिया के कुआलालंपुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीमती ज्योति शर्मा ने किया।
राज्योत्सव के इस अवसर पर संदीप शर्मा की मनोहारी प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ की माटी में न केवल संस्कृति की खुशबू है, बल्कि सुरों की वह शक्ति भी है जो दिलों को छू जाती है।





