निजी भूमि पर कब्जे की कोशिश — पार्टी के नाम पर जबरन वृक्षारोपण, भूस्वामी ने लगाई प्रशासन से गुहार 🌳






त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/कोरबा। जिले के ग्राम दाधरखुर्द में निजी स्वामित्व वाली भूमि पर कथित तौर पर एक संगठन द्वारा राजनीतिक और धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग करते हुए जबरन वृक्षारोपण किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घटना के बाद भूस्वामी शत्रुघन सिंह राजपूत ने प्रशासन से न्याय और त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
राजपूत ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में स्पष्ट कहा है कि उनकी पैतृक भूमि खसरा नंबर 1125 ग्राम दाधरखुर्द में स्थित है, जिसका सीमांकन विवाद वर्तमान में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के समक्ष लंबित है। उन्होंने बताया कि राजस्व विभाग द्वारा पहले सीमांकन कार्य शुरू किया गया था, मगर जांच पूरी न होने से उसे स्थगित कर दिया गया। अब पुनः सीमांकन की प्रक्रिया प्रस्तावित है।
राजपूत ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 1 नवम्बर 2025 को कुछ लोगों ने “गैर राजनीतिक संगठन” के नाम का भ्रामक उपयोग करते हुए उनकी निजी भूमि पर बिना अनुमति के वृक्षारोपण कर दिया।
उन्होंने कहा कि—
«“इन लोगों ने ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ के नाम का उपयोग कर ग्रामीणों की सामाजिक व धार्मिक भावनाओं को भड़काने का प्रयास किया है। यह कृत्य न केवल अवैधानिक है, बल्कि भूमि कब्जा की सोची-समझी साजिश प्रतीत होती है।”»
श्री राजपूत ने अपने आवेदन में चुनौती भरे शब्दों में लिखा है—
«“यदि प्रशासन यह सिद्ध कर दे कि यह भूमि मेरी नहीं है, तो मैं स्वयं अपने परिवार सहित वहाँ छत्तीसगढ़ महतारी के नाम से मंदिर और वृक्षारोपण कर दूँगा। लेकिन झूठे दावे, अवैध कब्जा और जबरन वसूली किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”»
भूस्वामी ने मांग की है कि उनकी भूमि पर किए गए अवैध रोपण को तत्काल रोका जाए, दोषियों के खिलाफ कड़ी दण्डात्मक कार्रवाई की जाए, और राजस्व अमला शीघ्र सीमांकन कर भूमि की वास्तविक सीमाएँ निर्धारित करे।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह विवाद पिछले कई महीनों से गाँव में चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि बाहरी लोगों द्वारा “संगठन” के नाम पर गांव में भ्रम फैलाया जा रहा है, जिससे सामाजिक सौहार्द्र बिगड़ने की आशंका है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जिला प्रशासन इस मामले पर क्या रुख अपनाता है — क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह विवाद और गहराएगा।
भूमि विवाद से उपजा यह मामला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बन गया है।





