मड़वारानी मंदिर मार्ग बना मौत का गड्ढा! ओवरब्रिज बनने के बाद से प्रशासन बेखबर — टोल वसूली में मस्त एनएचएआई, जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा ठेकेदार
1 min read



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ कोरबा। राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 149बी कोरबा-चांपा मार्ग में एनएचएआई की उदासीनता और ठेकेदार की लापरवाही अब जानलेवा साबित हो रही है। मड़वारानी मंदिर से सटे सर्विस रोड पर बने गहरे गड्ढे और धंसी सड़कों ने श्रद्धालुओं और आम लोगों की जान सांसत में डाल दी है। बरसात बीते महीनों गुजर चुके हैं, मगर एनएचएआई और प्रशासन ने मरम्मत की सुध तक नहीं ली।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब से ओवरब्रिज बना है, तब से ही यह सर्विस रोड दुर्गति का शिकार है, लेकिन किसी अधिकारी को इसकी परवाह नहीं। मंदिर आने-जाने वाले श्रद्धालु हर दिन दुर्घटना के खतरे से गुजरते हैं, वहीं जिम्मेदार अधिकारी “मूकदर्शक” बनकर सब कुछ देखते हैं।
🚧 “टोल टैक्स पूरा, सड़क अधूरी” — जनता पर दोहरा अन्याय
एनएच 149बी पर पचपेड़ी टोल प्लाजा से पिछले दो माह से टोल की वसूली धड़ल्ले से जारी है। लेकिन जिस सर्विस रोड और फोरलेन के नाम पर जनता से पैसा वसूला जा रहा है, वह आधी-अधूरी और जगह-जगह धंसी पड़ी है। मड़वारानी मंदिर मार्ग से लेकर बरपाली तक सर्विस रोड का अधिकांश हिस्सा या तो अधूरा है या बरसात में बह गया।
मंदिर परिसर से लगे गड्ढों में पानी भर जाता है और वाहनों के चलते कीचड़ मंदिर तक जा पहुंचता है। श्रद्धालु और पूजन सामग्री बेचने वाले दुकानदारों ने बताया कि अधिकारियों ने बरसात से पहले मरम्मत का आश्वासन दिया था, पर अब तक कुछ नहीं किया गया।
⚖️ “सड़क खराब तो टोल वसूली अवैध” — सुप्रीम कोर्ट ने भी लगाई फटकार
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2025 में स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि हाईवे की स्थिति अत्यंत खराब है, तो एनएचएआई को टोल वसूली का अधिकार नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा था कि “जब जनता उपयोगकर्ता शुल्क देती है, तो उसे अच्छी और सुरक्षित सड़क की समान गारंटी मिलनी चाहिए।”
ऐसे में मड़वारानी सर्विस रोड की जर्जर हालत में टोल वसूली जारी रखना जनता के अधिकारों का खुला उल्लंघन है।
🏗️ अवैध कब्जा और प्रशासनिक ढिलाई से बिगड़ी व्यवस्था
बरपाली और मड़वारानी अंडरब्रिज की स्थिति और भी भयावह है। दोनों ही जगह अवैध कब्जे ने सड़क को बाजार बना दिया है। बरपाली अंडरब्रिज के भीतर डेली मार्केट और अस्थायी टैक्सी स्टैंड तक चल रहा है।
यह इलाका तहसील मुख्यालय होने के बावजूद प्रशासनिक लापरवाही की मिसाल बना हुआ है।
लोगों का कहना है कि तहसीलदार और अधिकारी रोज यहां से गुजरते हैं, पर कभी कोई कार्रवाई नहीं होती। कई बार यहां दुर्घटनाएं होते-होते टली हैं, लेकिन एनएचएआई और स्थानीय प्रशासन दोनों ने आंख मूंद ली है।
💥 जनता का सवाल — “सड़क कब बनेगी? टोल क्यों दे?”
स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया है कि जब सर्विस रोड अधूरी है, अंडरब्रिज पर कब्जा है और सड़क गड्ढों में बदल चुकी है, तो एनएचएआई किस सेवा के लिए टोल वसूल रहा है?
लोगों की मांग है कि या तो सर्विस रोड और राजमार्ग को तत्काल दुरुस्त किया जाए या फिर टोल वसूली पर रोक लगाई जाए।
🛑
मड़वारानी मंदिर मार्ग सिर्फ श्रद्धा का केंद्र नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता की जीती-जागती मिसाल बन गया है। ओवरब्रिज बनने के बाद से आज तक कोई ठोस सुधार नहीं हुआ — और अब यह सड़क दुर्घटना का इंतज़ार करती मौत की पटरी बन चुकी है।







