February 12, 2026

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दीपका में “क्वार्टर कनेक्शन” घोटाला! — एसईसीएल के सरकारी आवास बने बाहरी रईसों का ठिकाना, कर्मचारी भटक रहे किराए के घरों में

 

 दीपका क्षेत्र में उजागर हुआ आवास घोटाला — आरटीआई में खुलासा, 39 बाहरी लोगों को दिए गए कोल कर्मियों के क्वार्टर, 37 पर बेजा कब्जा — प्रबंधन की चुप्पी पर कर्मचारियों में फूटा गुस्स
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/  दीपका (कोरबा), 20 अक्टूबर 2025।
एसईसीएल दीपका क्षेत्र से एक और बड़ा घोटाला सामने आया है — इस बार मामला आवासीय भ्रष्टाचार का है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दीपका क्षेत्र के सरकारी क्वार्टर, जो मूल रूप से एसईसीएल के कोल कर्मियों के लिए बनाए गए थे, अब रईसों, ठेकेदारों और रसूखदार बाहरी लोगों के आरामगाह बन चुके हैं।
यानी जो मकान मजदूरों और अधिकारियों के हक में थे, अब वहां वे लोग ऐश कर रहे हैं जिनका एसईसीएल से कोई लेना-देना तक नहीं है।

 

आवास बने रसूखदारों का ठिकाना!
जानकारी के मुताबिक, दीपका क्षेत्र के कुछ प्रभावशाली अधिकारियों ने अपने परिचितों और सिफारिशी लोगों को खुश करने के लिए आवास नियमों को ताख पर रख दिया।
विधायक प्रतिनिधि, बाहरी शिक्षक, सेवानिवृत्त कर्मी, यहां तक कि कुछ ठेकेदार जिनका कोई सक्रिय ठेका भी नहीं है, सभी को प्रबंधन की मौन स्वीकृति से आवास दे दिए गए।
स्थानीय सूत्र बताते हैं कि ये “आवासीय सौगातें” संबंधों और सिफारिशों के दम पर दी गईं, जबकि एसईसीएल के वास्तविक कर्मी किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं।
आरटीआई में खुलासा — चौंकाने वाले आंकड़े
इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी सामने आई।
दस्तावेज़ों के अनुसार:
39 बाहरी लोगों को विभाग से बाहर होकर भी क्वार्टर दिए गए हैं।

 

 

37 सरकारी आवासों पर बेजा कब्जा है।
और सबसे हैरान करने वाली बात — यह स्वयं प्रबंधन की रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है!
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब प्रबंधन को खुद पता है कि क्वार्टरों पर अवैध कब्जा है, तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
क्या दीपका क्षेत्र के आवास अब “नियमों” नहीं, बल्कि “रिश्तों” से चलेंगे?
कर्मचारी संगठनों में उबाल
घोटाले के खुलासे के बाद कर्मचारी संगठनों में जबरदस्त आक्रोश है।
उनका आरोप है कि प्रबंधन ने कर्मचारियों के हक पर डाका डाला है।
कई कर्मचारी सालों से प्रतीक्षा सूची में हैं और बाहर किराए के घरों में रह रहे हैं, जबकि अंदर उन लोगों को घर दे दिए गए हैं जिनका एसईसीएल से कोई सीधा संबंध नहीं।
“यह कर्मचारियों के अधिकारों पर सीधा प्रहार है। अगर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई, तो हम मुख्यालय घेराव करेंगे,”
— स्थानीय कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों का कहना है।
वरिष्ठ अफसरों की भूमिका पर सवाल
सूत्रों का दावा है कि इस आवासीय हेराफेरी में कुछ वरिष्ठ अफसरों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संरक्षण है।
स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं —

 

“क्या दीपका अब कोल एरिया नहीं, पावर लॉबी का पर्सनल ज़ोन बन गया है?”
सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या यह पूरी आवासीय नीति अब “सुविधा के हिसाब से कानून” पर चल रही है?
कर्मचारी पूछ रहे हैं — ‘क्वार्टर कर्मियों का या नेताओं का?’
कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन आवासों को गैर-एसईसीएल लोगों से खाली नहीं कराया गया, तो वे न केवल मुख्यालय का घेराव करेंगे बल्कि कानूनी कार्रवाई भी शुरू करेंगे।
अब गेंद पूरी तरह प्रबंधन के पाले में है।
देखना यह होगा कि क्या एसईसीएल दीपका के अधिकारी नियमों का सम्मान करेंगे या फिर सिफारिशों के आगे झुककर “क्वार्टर कनेक्शन घोटाले” को दबाने की कोशिश करेंगे।
यह मामला सिर्फ भ्रष्टाचार का नहीं — यह उन सैकड़ों कर्मचारियों की उम्मीदों से खिलवाड़ का प्रतीक है, जो सालों से एक सरकारी छत की आस में हैं।

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