दीपका खदान में “टायर नहीं, बूस्टर फटा था!” — एसईसीएल की लापरवाही से मचा धमाका, मजदूर के उड़े दोनों पैर, अब डीजीएमएस जांच में खुलेंगे कई काले राज!


सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाकर खदान में हुआ भीषण विस्फोट — प्रबंधन ने टायर फटने की कहानी गढ़कर सच्चाई छिपाने की की कोशिश, अब सामने आ रहा है खतरनाक सच।
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा दीपका, कोरबा।
एसईसीएल की दीपका खदान में बीते दिन हुआ भीषण विस्फोट अब सुरक्षा लापरवाही का घोर उदाहरण बन चुका है। प्रारंभिक रिपोर्टों में जिसे “टायर फटने” की सामान्य घटना बताया गया था, वह दरअसल बूस्टर विस्फोट निकला — यानी वह घातक विस्फोटक पदार्थ, जिसका उपयोग ब्लास्टिंग के दौरान सख्त निगरानी में होना चाहिए। यह खुलासा अब पूरे प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
घटना का विवरण:
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह हादसा एलके-1 (मरघट साइड) में ब्लास्टिंग कार्य के दौरान हुआ। गेवरा क्षेत्र से बूस्टर लेकर दीपका खदान में पहुंची टीम को ड्रिल किए गए होलों में बूस्टर डालना था। लेकिन नियमानुसार सुरक्षा मानकों का पालन न करते हुए भारी भरकम बारूद लदे ट्रक को ब्लास्टिंग फेस के ठीक सामने ले जाकर खड़ा कर दिया गया।
सामान्य प्रक्रिया के अनुसार ऐसे ट्रकों को ब्लास्टिंग पॉइंट से कम से कम 200–300 मीटर दूर खड़ा किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी संभावित हादसे से बचा जा सके।
परंतु सुरक्षा नियमों की खुली अवहेलना के चलते लगभग 25 टन वजनी ट्रक का दबाव पहले से बूस्टर डाले गए ड्रिल होल पर पड़ा, जिससे एकाएक भयावह विस्फोट हो गया।
धमाका इतना भीषण था कि ट्रक के टायर, मेटल पार्ट्स और धूल के कण कई मीटर दूर तक उड़ गए, वहीं पास में मौजूद एक मजदूर गंभीर रूप से झुलस गया — दोनों पैर कटने से वह आजीवन विकलांग हो गया।
प्रबंधन की “टायर फटने” की कहानी:
घटना के बाद एसईसीएल प्रबंधन ने मामले को दबाने की कोशिश करते हुए इसे “टायर फटने” का मामूली हादसा बताया, लेकिन चश्मदीद मजदूरों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार यह कहानी सच्चाई से कोसों दूर थी।
मौके पर मौजूद कर्मियों ने बताया कि ब्लास्टिंग इंचार्ज घटना के समय स्थल पर मौजूद नहीं थे, वे करीब 5 किलोमीटर दूर केसीसी साइड में थे। ऐसे में पूरी जिम्मेदारी ओवरमैन पर थी, जिन्होंने सुरक्षा प्रोटोकॉल का खुलेआम उल्लंघन किया।
अब डीजीएमएस की एंट्री:
घटना के गंभीर स्वरूप को देखते हुए अब डीजीएमएस (Directorate General of Mines Safety) ने जांच अपने हाथ में ले ली है।
डीजीएमएस की टीम ने प्रारंभिक जांच में कई तकनीकी और सुरक्षा उल्लंघन की पुष्टि की है। जांच रिपोर्ट से यह भी उजागर हो सकता है कि बूस्टर की निगरानी, परिवहन और उपयोग में घोर लापरवाही बरती गई।
मजदूर संगठनों का गुस्सा भड़का:
स्थानीय मजदूर संगठनों ने इस हादसे को “प्रबंधन की घोर लापरवाही का परिणाम” बताया है। उनका कहना है कि एसईसीएल में काम का दबाव इतना अधिक है कि अधिकारी और ठेकेदार सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर कार्य कराते हैं।
उन्होंने सवाल उठाया — “जब बूस्टर जैसे संवेदनशील विस्फोटक की निगरानी में इतने बड़े स्तर पर चूक हुई, तो क्या यह मानव जीवन की कीमत पर उत्पादन बढ़ाने की नीति नहीं?”
स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग:
घटना के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी उच्चस्तरीय जांच और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं बार-बार यह साबित करती हैं कि एसईसीएल के कई क्षेत्रों में सुरक्षा प्रोटोकॉल केवल कागजों तक सीमित हैं।
सिस्टम को झकझोर देने वाला सबक:
दीपका खदान का यह हादसा सिर्फ एक मजदूर की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है। जब सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज कर उत्पादन बढ़ाने की होड़ लगाई जाती है, तो उसका खामियाजा सबसे निचले स्तर पर काम करने वाले मजदूर को अपनी जान या अंग गंवाकर चुकाना पड़ता है।
अब देखना यह है कि डीजीएमएस जांच के बाद कौन-कौन से चेहरे बेनकाब होते हैं — और क्या इस बार भी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश होगी, या वास्तव में किसी को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

