नम आंखों से दी गई बनवारी भैय्या को अंतिम विदाई, श्रद्धांजलि के सागर में उमड़ा कोरबा






मोतीसागर मुक्तिधाम में पूरे राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार, हर कंधा बेताब दिखा अपने प्रिय नेता को कंधा देने
🕊️ कोरबा में शोक की लहर
छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष, वरिष्ठ भाजपा नेता और जनसेवा के प्रतीक स्वर्गीय बनवारी लाल अग्रवाल (बनवारी भैय्या) का अंतिम संस्कार आज गुरुवार को मोतीसागर पारा मुक्तिधाम में राजकीय सम्मान के साथ संपन्न हुआ।
तिरंगे में लिपटी उनकी पार्थिव देह को ससम्मान सलामी दी गई।
🚩 जनसैलाब बना अंतिम यात्रा का दृश्य
अंतिम यात्रा उनके नीज निवास दुरपा रोड स्थित पुरानी बस्ती से निकली।
जनसैलाब उमड़ पड़ा — प्रदेश के लोक स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल, और भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी सहित हजारों लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
पूरे अंचल के लोग नम आंखों से “बनवारी भैय्या अमर रहें” के नारे लगाते हुए यात्रा में शामिल रहे।
हर कंधा बेताब दिखा अपने नेता की पार्थिव देह को कंधा देने।
🌿 राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
मुक्तिधाम में प्रशासन की ओर से राजकीय सम्मान की औपचारिकताएं पूरी की गईं।
पुलिस विभाग ने गार्ड ऑफ ऑनर और सैल्यूट देकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
भाजपा कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने सजल नयनों से पुष्पांजलि अर्पित की।
🕯️ जनसेवा के प्रतीक बनवारी भैय्या
78 वर्षीय बनवारी लाल अग्रवाल ने अपना संपूर्ण जीवन समाज सेवा और जनहित के कार्यों को समर्पित किया था।
उन्होंने अविभाजित मध्यप्रदेश से लेकर छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद तक राजनीति में एक सम्मानजनक पहचान बनाई।
वे जनता के बीच “बनवारी भैय्या” के नाम से लोकप्रिय थे और सरल, मिलनसार स्वभाव के कारण हर वर्ग में प्रिय रहे।
🏠 परिजनों की उपस्थिति में भावभीनी विदाई
उनके परिवार के सभी सदस्य, रिश्तेदार और शुभचिंतक उपस्थित रहे।
परिजनों ने बताया कि वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और घर पर ही उपचाररत थे।
बुधवार रात लगभग 10:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
🕊️ राजनीति को अपूरणीय क्षति
बनवारी भैय्या के निधन से कोरबा सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई।
नेताओं ने कहा — “बनवारी भैय्या का जाना प्रदेश की राजनीति और समाजसेवा दोनों के लिए अपूर्णीय क्षति है।”
श्रद्धांजलि सभा में हर नेत्र सजल था और हर हृदय भावविभोर।
✍🏼 विशेष
बनवारी लाल अग्रवाल ने राजनीति में एक ऐसी पहचान बनाई जो दलगत सीमाओं से परे थी। उनके सादगीपूर्ण जीवन, जनसेवा की निष्ठा और समाजहित के लिए समर्पण ने उन्हें हमेशा “जनता का नेता” बनाकर रखा। आज कोरबा ने केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक खो दिया।





