August 15, 2026

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दीपका में आवास आवंटन पर कर्मचारियों का फूटा गुस्सा — बाहरियों को क्वार्टर, अपने कर्मियों को इंतज़ार! प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल

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कोरबा/दीपका।एसईसीएल दीपका क्षेत्र में आवास आवंटन को लेकर कर्मचारियों का आक्रोश चरम पर है। कर्मचारियों का आरोप है कि आवास वितरण में गड़बड़ियां व पक्षपात के कारण वर्षों से विभागीय कर्मचारी किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं, जबकि बाहरी लोग आराम से सरकारी क्वार्टरों में डेरा जमाए हुए हैं। इस मुद्दे पर प्रबंधन की चुप्पी और निष्क्रियता ने कर्मचारियों में असंतोष की आग भड़का दी है।
कोल विभाग के एक कर्मचारी ने महाप्रबंधक को आवेदन देते हुए कहा — “पांच साल से दर-दर की ठोकर खा रहा हूं, लेकिन आज तक आवास नहीं मिला। मुझसे जूनियर कर्मचारियों को बी-टाइप क्वार्टर तक दे दिए गए, जबकि मैं परिवार सहित किराए के मकान में रहने को मजबूर हूं। आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव के कारण त्यौहार भी बेरंग गुजर रहे हैं।”
👉 आवास व्यवस्था में अनियमितता के गंभीर आरोप
कर्मचारियों ने बताया कि प्रगति नगर कॉलोनी की स्थिति बदहाल है — जहां एक क्वार्टर में चार-चार कर्मचारियों को ठूंसकर रखा गया है। वहीं दूसरी ओर कई ऐसे लोग क्वार्टर में रह रहे हैं जिनका एसईसीएल से कोई संबंध ही नहीं है। इन बाहरी और अवैध कब्जाधारियों को न केवल क्वार्टर खाली कराने की कार्रवाई नहीं की जा रही, बल्कि उन्हें अनदेखे ढंग से ‘अभयदान’ दिया जा रहा है।
कर्मचारियों ने सवाल उठाया — “जब अपने ही नियमित कर्मचारियों को आवास नहीं मिल पा रहा, तो बाहरियों को क्वार्टर देने की नीति किसके हित में है? दीपका प्रबंधन आखिर काम अपने कर्मियों के लिए कर रहा है या बाहरियों के लिए?”
👉 कर्मचारियों ने प्रबंधन को चेताया
कर्मचारियों ने मांग की है कि —
सबसे पहले विभागीय कर्मचारियों को आवास प्राथमिकता से उपलब्ध कराया जाए।
बाहरी और अवैध कब्जाधारियों से तत्काल क्वार्टर खाली कराए जाएं।
आवास आवंटन की प्रक्रिया पारदर्शी और मेरिट आधारित बनाई जाए।
उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर स्थिति में शीघ्र सुधार नहीं हुआ तो यह मामला आंदोलन का रूप ले सकता है और इसके लिए प्रबंधन जिम्मेदार होगा।
दीपका क्षेत्र में बढ़ते इस असंतोष ने एसईसीएल प्रबंधन की कार्यशैली और आवास नीति पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यह केवल सुविधा का मुद्दा नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा के बाद भी न मिलने वाले अधिकारों की अनदेखी का मामला है — जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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