भोजली तिहार में उमड़ा बांकीमोंगरा का उत्साह, पालिका अध्यक्ष सोनी कुमारी झा ने की पूजा-अर्चना, क्षेत्र की खुशहाली की कामना


त्रिनेत्र टाइम्स बांकीमोंगरा। छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक भोजली तिहार रक्षाबंधन के अगले दिन प्रदेशभर में उल्लास और भक्ति के साथ मनाया गया। बांकीमोंगरा में भी इस पर्व की रौनक देखते ही बन रही थी। विभिन्न मोहल्लों से सजी-धजी शोभायात्राएं निकाली गईं और पारंपरिक गीत-संगीत के बीच भोजली दाई का विसर्जन किया गया।




इसी क्रम में कुधरीपारा में भोजली विसर्जन का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा की अध्यक्ष श्रीमती सोनी कुमारी झा विशेष रूप से शामिल हुईं। उन्होंने भक्तों के साथ कुछ दूरी तक शोभायात्रा में चलकर भोजली दाई को विदा किया और मंदिर प्रांगण में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर नगर और क्षेत्र की खुशहाली, हरियाली और अच्छी फसल की कामना की।




श्रीमती झा ने इस अवसर पर कहा—
“भोजली तिहार छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक एकता और लोक आस्था का जीवंत प्रतीक है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मित्रता और भाईचारे का पर्व है, जिसे मीत-मितानी का त्योहार भी कहा जाता है।”



आयोजन में भाग लेने वाले सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति से भोजली दाई को विदाई दी। इस अवसर पर पालिका अध्यक्ष का स्वागत विभिन्न समितियों द्वारा श्रीफल और गमछे से किया गया।
कार्यक्रम में वार्ड क्रमांक 15 के पार्षद मधूसुदन दास, वार्ड क्रमांक 2 की पार्षद श्रीमती राजकुमारी, वार्ड क्रमांक 13 (कटाईनार-1) के पार्षद अश्वनी कुमार मिश्रा, मंडल महामंत्री श्रीमती अनिता राजपूत सहित आसपास के क्षेत्रों से आए सैकड़ों लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
भोजली तिहार की सांस्कृतिक पहचान
भोजली तिहार सावन माह की समाप्ति पर मनाया जाने वाला लोक पर्व है, जिसमें महिलाएं और बालिकाएं हरी-हरी फसलों की प्रतीक मूर्तियां (भोजली) बनाकर उनकी पूजा करती हैं। रक्षाबंधन के अगले दिन शोभायात्रा के रूप में भोजली का विसर्जन किया जाता है। इसे मीत-मितानी का पर्व भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन नई मित्रता और आपसी भाईचारे का संकल्प लिया जाता है।
बांकीमोंगरा में इस वर्ष का भोजली तिहार न केवल भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम रहा, बल्कि सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक गौरव का जीवंत उदाहरण भी बना।

