August 16, 2026

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लाल चौक पर लहराया था तिरंगा: 1992 की ‘एकता यात्रा’ में आतंक के सामने अडिग रहे मोदी जी

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त्रिनेत्र टाइम्स नई दिल्ली/श्रीनगर। भारत की एकता और अखंडता के प्रतीक के रूप में इतिहास के पन्नों में दर्ज ‘एकता यात्रा’ दिसंबर 1991 में कन्याकुमारी से प्रारंभ हुई थी। यह यात्रा कई राज्यों से गुजरते हुए कश्मीर तक पहुंची। इस ऐतिहासिक अभियान में युवा नेता के रूप में श्री नरेन्द्र मोदी भी सक्रिय रूप से शामिल थे। यात्रा का उद्देश्य था—देशभर में राष्ट्रीय एकता का संदेश देना और जम्मू-कश्मीर में तिरंगे की शान को पुनः स्थापित करना।

योजना के अनुसार यह यात्रा 26 जनवरी 1992 को श्रीनगर के लाल चौक पर समाप्त होनी थी। लेकिन इसके पहले, 23 जनवरी 1992 को आतंकवादियों ने फगवाड़ा में कश्मीर जा रहे यात्रियों की बसों पर हमला कर दिया। इतना ही नहीं, श्रीनगर की दीवारों पर उकसाने वाला संदेश लिख दिया गया—
“जिसने अपनी मां का दूध पिया है, वो लाल चौक पर आकर तिरंगा फहराए। अगर वो ज़िंदा लौट गया तो हम उसे इनाम देंगे।”

तनावपूर्ण माहौल के बीच भी यात्रा रुकी नहीं। 25 जनवरी को, लाल चौक पहुंचने से पहले, श्री नरेन्द्र मोदी ने गर्जन भरे शब्दों में आतंकियों को चेतावनी दी—
“आतंकियों, कान खोलकर सुन लो! 26 जनवरी में चंद घंटे बाकी हैं। लाल चौक में फैसला हो जाएगा कि किसने अपनी मां का दूध पिया है।”

अंततः, 26 जनवरी 1992 को, कड़ाके की ठंड और सुरक्षा चुनौतियों के बीच, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, श्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के दर्जनों नेताओं ने श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराया। यह क्षण न केवल एकता यात्रा की सफलता का प्रतीक बना, बल्कि देशभर के लोगों के लिए साहस, देशभक्ति और संकल्प की अमिट मिसाल भी बन गया।

आज, जब #HarGharTiranga अभियान हर कोने में तिरंगे का मान बढ़ा रहा है, यह ऐतिहासिक घटना हमें याद दिलाती है कि राष्ट्रीय ध्वज की शान के लिए हर चुनौती का सामना करना ही सच्ची देशभक्ति है।

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