कोरबा का श्री सप्तदेव मंदिर बनेगा मथुरा- वृंदावन का प्रतीक, 16 अगस्त को होगा ऐतिहासिक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव


त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा। छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक और धार्मिक मानचित्र पर विशेष पहचान रखने वाला श्री सप्तदेव मंदिर इस वर्ष भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के भव्य आयोजन के लिए सज-धज कर तैयार हो चुका है। यह मंदिर न केवल कोरबा बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों में अपनी अद्वितीय भव्यता, मनमोहक सजावट और आध्यात्मिक माहौल के लिए प्रसिद्ध है। जन्माष्टमी के दौरान यहां का वातावरण मथुरा और वृंदावन के उत्सव जैसा होता है, जिसमें भक्ति, उल्लास और सांस्कृतिक रंग एक साथ दिखाई देते हैं।
इतिहास से वर्तमान तक का सफर
मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख श्री अशोक मोदी के अनुसार, सन् 1994 में मंदिर स्थापना के समय पहली बार आयोजित जन्माष्टमी महोत्सव में करीब 5 हजार श्रद्धालु उपस्थित हुए थे। उस समय मंदिर परिसर में एक साधारण मंच, फूलों की हल्की सजावट और सीमित व्यवस्थाएं थीं, लेकिन श्रद्धालुओं का उत्साह असीम था।
वर्ष दर वर्ष यह आयोजन आकार और भव्यता में बढ़ता गया—
2000 के दशक में पहली बार विद्युत सजावट और बाल लीलाओं की झांकियों की शुरुआत हुई।
2010 में पहली बार मंचीय भजन संध्या और सांस्कृतिक नृत्य-नाटिका जोड़ी गई।
2015 में श्रद्धालुओं की संख्या 25 हजार के पार पहुंची।
2024 में यह रिकॉर्ड तोड़ते हुए 50 हजार से अधिक भक्त पहुंचे, जिससे श्री सप्तदेव मंदिर का नाम प्रदेश में सबसे बड़े जन्माष्टमी आयोजनों में शामिल हो गया।
इस वर्ष की विशेष तैयारियां
2025 के इस आयोजन को और भव्य बनाने के लिए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में बड़े-बड़े पंडालों की सजावट की जा रही है। हर पंडाल में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित आकर्षक और जीवंत झांकियां प्रदर्शित होंगी—जैसे माखन चोरी, कालिया नाग दमन, गोवर्धन पर्वत धारण और गोपियों संग रासलीला। इन झांकियों के निर्माण में कलाकारों ने महीनों मेहनत की है, जो हर उम्र के भक्तों के लिए विशेष आकर्षण रहेंगी।
भक्तों और बच्चों के लिए विशेष प्रतियोगिताएं
मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं और बच्चों की सहभागिता को और रोचक बनाने के लिए विशेष प्रतियोगिताएं तय की हैं—
15 अगस्त 2025, शुक्रवार, दोपहर 3 से 5 बजे: “लड्डू गोपाल सजाओ प्रतियोगिता”
16 अगस्त 2025, शनिवार, दोपहर 3 से 5 बजे: “श्रीकृष्ण बनो प्रतियोगिता”
इनमें भाग लेने वाले प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय, तृतीय और सांत्वना पुरस्कार दिए जाएंगे। निर्णायक की भूमिका मंदिर महिला मंडल की सदस्याएं निभाएंगी।
मुख्य आयोजन और आध्यात्मिक क्षण
मुख्य उत्सव दिवस 16 अगस्त को शाम 4 बजे से रात 1 बजे तक भक्तजन झांकियों के दर्शन करेंगे। रात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्म विधि-विधान से संपन्न होगा। जन्म की घड़ी में मंदिर परिसर भजनों की मधुर ध्वनियों, शंख-घंटियों की गूंज और आतिशबाजी की जगमगाहट से भर उठेगा।
मंदिर ट्रस्ट ने भक्तों से अपील की है कि वे अपने परिवार और मित्रों के साथ आकर इस वर्ष के श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव में सम्मिलित हों, झांकियों और प्रतियोगिताओं का आनंद लें और इस पावन अवसर पर आध्यात्मिक आनंद के साथ पुण्य लाभ प्राप्त करें।

