July 22, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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रायपुर में मितानिनों का ज्वालामुखी फूटा – 7 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल का अल्टीमेटम, बोलीं- “अब सम्मान दो, वरना पूरे छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाएं ठप कर देंगे!”

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त्रिनेत्र टाइम्स रायपुर/कोरबा।
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ मानी जाने वाली मितानिनें और मितानिन प्रशिक्षक अब फट चुके ज्वालामुखी की तरह फट पड़े हैं। वर्षों से उपेक्षा, वादाखिलाफी और शोषण सहने के बाद उन्होंने राजधानी रायपुर के तूता धरना स्थल में ऐसा जनसैलाब उतारा कि पूरा रायपुर हिल उठा। हजारों की संख्या में एकजुट होकर उन्होंने सरकार को साफ-साफ अल्टीमेटम दे दिया – “6 अगस्त तक मांगे पूरी करो, नहीं तो 7 अगस्त से पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं ठप कर देंगे!”

मांगें नहीं मानीं तो 7 अगस्त से तालाबंदी!

इस प्रदेशव्यापी आंदोलन में मितानिन संघ और मितानिन प्रशिक्षक कल्याण संघ ने साफ कर दिया है कि अब सिर्फ बातों से काम नहीं चलेगा। इस धरना में प्रदेश के कोने-कोने से आए मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, हेल्थ फैसिलिटेटर, हेल्प डेस्क मितानिन और ब्लॉक कोऑर्डिनेटर शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने मंच से गरजते हुए कहा,
“छत्तीसगढ़ सरकार हमें चुनाव के समय झूठे सपने दिखाकर भूल गई। 20 साल से हम गांव-गांव की स्वास्थ्य सेवाओं को बचाए हुए हैं, लेकिन हमें न मान-सम्मान, न उचित वेतन और न ही स्थायी नौकरी मिली। अब अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो मजबूरी में हम हड़ताल करेंगे और फिर प्रदेश का स्वास्थ्य ढांचा ठप होगा।”

प्रमुख तीन सूत्रीय मांगें – अब कोई समझौता नहीं!

  1. चुनावी वादे के मुताबिक संविलियन: एनएचएम के तहत कार्यरत सभी मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर और ब्लॉक कोऑर्डिनेटर का तुरंत संविलियन।
  2. 50% वेतन वृद्धि: कार्य के अनुपात में मानदेय और वेतन में 50 प्रतिशत तत्काल वृद्धि।
  3. ठेका प्रथा का खात्मा: एनजीओ के माध्यम से ठेका पद्धति को खत्म कर सीधी सरकारी नियुक्ति।

धरने में नेताओं ने कहा कि ठेका पद्धति के नाम पर शोषण का खेल वर्षों से चल रहा है। कभी पुराने सदस्यों के अधीन काम करवाया, अब नए सदस्यों को ऊपर बैठाकर वही खेल दोहराया जा रहा है। यह बंद होना चाहिए।

कोरबा जिले का दमदार योगदान – 3090 मितानिनें मैदान में!

धरना स्थल पर कोरबा जिला सबसे आगे नजर आया। जिले के पांचों विकासखंडों से लगभग 3090 मितानिनें, 122 प्रशिक्षक, 10 ब्लॉक कोऑर्डिनेटर और 5 हेल्प डेस्क मितानिन सुबह 5 बजे ही निजी वाहनों से रायपुर पहुंचीं। इतना ही नहीं, ग्राम जवाली की 10 मितानिनों ने भी अपनी जिम्मेदारियां छोड़कर इस आंदोलन में भाग लिया। यह बताता है कि अब गांव-गांव की मितानिनें भी चुप रहने को तैयार नहीं हैं।

चेतावनी – “अब हम रुकेंगे नहीं!”

धरना स्थल पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन इस शांत माहौल के भीतर उबलता हुआ गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था। मितानिनें बार-बार नारे लगा रही थीं –
“वादा निभाओ, हक दिलाओ, नहीं तो स्वास्थ्य सेवाएं ठप कराओ!”
प्रदर्शन के बाद संघ ने सरकार को ज्ञापन सौंपा और दो टूक कहा –
“हमने 6 अगस्त की अंतिम तारीख दी है। अगर तब तक हमारी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो 7 अगस्त से पूरे छत्तीसगढ़ में अनिश्चितकालीन हड़ताल होगी। तब अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र, गांव-गांव की सेवाएं सब रुक जाएंगी, और जिम्मेदार खुद सरकार होगी।”

सरकार के लिए आखिरी चेतावनी

धरने में मौजूद नेताओं ने कहा कि अब यह सिर्फ मानदेय की लड़ाई नहीं, बल्कि सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई है। चुनाव के समय घोषणा पत्र में जो वादे किए थे, उन्हें पूरा करो, नहीं तो प्रदेश की जनता और स्वास्थ्य तंत्र ठप होने के लिए तैयार रहे।

क्यों महत्वपूर्ण है मितानिन?

मितानिन कार्यक्रम को भारत सरकार और राज्य सरकार ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ कहा है। टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण, जागरूकता और प्राथमिक चिकित्सा – इन सभी मोर्चों पर मितानिनें ही सबसे आगे रही हैं। लेकिन 20 वर्षों की सेवा के बाद भी आज वे स्थिरता और सम्मान के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हैं।

यह धरना सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संदेश है कि अब मितानिनें जाग चुकी हैं। अगर सरकार ने तुरंत संवेदनशीलता नहीं दिखाई तो 7 अगस्त से छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो जाएंगी और इसकी सीधी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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