बिलासपुर की गीतांजलि सिटी फेस-2 में नागरिक सुविधाओं का टोटा, बारिश में डूबे घर-घुटनों तक भरा पानी, रहवासी परेशान




त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ बिलासपुर, छत्तीसगढ़। न्यायधानी के नाम से प्रसिद्ध और स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित हो रहे बिलासपुर शहर की पॉश कॉलोनियों में गिनी जाने वाली गीतांजलि सिटी फेस-2 आज बदहाली का जीता-जागता उदाहरण बन गई है। 6 एकड़ क्षेत्रफल में बसी इस बड़ी आवासीय कॉलोनी में नागरिक सुविधाओं के अभाव और बारिश के बाद जलभराव ने रहवासियों की जिंदगी को नारकीय बना दिया है।
रहवासियों का कहना है कि कॉलोनाइजर एस.आर. साहू और गीतांजलि कंस्ट्रक्शन ने घर बेचने के समय सुनहरे सपने दिखाए थे। उन्होंने बेहतर सड़कें, ड्रेनेज सिस्टम, स्ट्रीट लाइट, गार्डन और हर नागरिक सुविधा देने का आश्वासन दिया था। लेकिन आज तक कॉलोनी में न तो ढंग की सड़कें बनीं, न नालियां, न ही ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त किया गया।
प्रधान मोहन सिंह (प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ महतारी संस्कृति संवर्धन सेवा समिति) ने बताया कि “रहवासी बार-बार कॉलोनाइजर, नगर निगम और जनप्रतिनिधियों से शिकायत कर चुके हैं। यहां तक कि छत्तीसगढ़ सरकार के ‘सुशासन तिहार’ अभियान के तहत भी समस्याएं दर्ज कराई गईं। बावजूद इसके आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।”
भारी बारिश ने खोली पोल, घरों में घुसा कमर तक पानी
आज हुई बारिश ने कॉलोनी की बदहाली की पोल खोल दी। गली नंबर-3 के लगभग सभी घरों में पानी घुस गया। लोगों के बिस्तर, राशन, बच्चों की किताबें और घर का सामान पानी में डूबकर खराब हो गया। सड़कों पर कमर तक पानी भर जाने से आवागमन ठप हो गया। रहवासियों ने बताया कि “अब तो घरों में घुटनों तक पानी भरा है। यह स्थिति भयावह हो चुकी है।”
कॉलोनी अधिग्रहण के बाद भी सुध नहीं
गीतांजलि सिटी फेस-2 को वर्ष 2019 में नगर निगम बिलासपुर के अधीन कर लिया गया था। इसके बावजूद नगर निगम ने कॉलोनी में कोई मूलभूत सुविधा विकसित नहीं की। रहवासी हर साल ईमानदारी से भू-राजस्व और संपत्ति कर अदा कर रहे हैं, फिर भी उन्हें नालियों, सड़कों और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
“सुनवाई नहीं, जिम्मेदारी तय हो” – मोहन सिंह
मोहन सिंह ने कहा, “कॉलोनाइजर, नगर निगम और शासन—तीनों अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। यह कॉलोनी बिलासपुर के हृदयस्थल में है और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का हिस्सा है। फिर भी यहां के लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। अब सवाल है कि जिम्मेदारी कौन लेगा?”
उन्होंने आगे कहा, “शासन और प्रशासन को तत्काल प्रभाव से हस्तक्षेप कर कॉलोनाइजर पर दबाव बनाना चाहिए और रहवासियों को मूलभूत सुविधाएं दिलानी चाहिए। अन्यथा यह मुद्दा राज्यव्यापी आंदोलन का रूप ले सकता है।”
बड़े नेताओं का निर्वाचन क्षेत्र, फिर भी उपेक्षा
यह उल्लेखनीय है कि बिलासपुर से ही छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और पूर्व मंत्री व वर्तमान विधायक अमर अग्रवाल जैसे बड़े नेता हैं। बावजूद इसके इस कॉलोनी की उपेक्षा रहवासियों के लिए बेहद दुखद और पीड़ादायक है।
रहवासियों की मांगें:
✅ तत्काल ड्रेनेज और नाली निर्माण
✅ सड़कें और स्ट्रीट लाइट दुरुस्त करना
✅ कॉलोनाइजर पर कार्रवाई और उसकी जिम्मेदारी तय करना
✅ नगर निगम द्वारा नागरिक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना
बिलासपुर स्मार्ट सिटी के सपने को साकार करने के प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन गीतांजलि सिटी फेस-2 जैसी कॉलोनियों की अनदेखी सरकार और प्रशासन की गंभीर विफलता को उजागर करती है। रहवासियों को उम्मीद है कि छत्तीसगढ़ सरकार, नगर निगम और जिला प्रशासन इस समस्या पर अविलंब ध्यान देंगे और स्थायी समाधान सुनिश्चित करेंगे।


