चिकित्सक दिवस पर विशेष: भोजन के बाद पानी पीना क्यों है हानिकारक — जानिए जठराग्नि और पाचन विज्ञान का रहस्य




त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ कोरबा। चिकित्सक दिवस के अवसर पर नाड़ी वैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा द्वारा दिए गए स्वास्थ्यवर्धक और ज्ञानवर्धक संदेश में भोजन और जल सेवन के बीच संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई। उन्होंने कहा कि “भोजनान्ते विषं वारी” अर्थात् भोजन के तुरंत बाद पानी पीना विष के समान होता है, क्योंकि यह शरीर की जठराग्नि को शांत कर देता है, जिससे भोजन ठीक से पच नहीं पाता।
डॉ. शर्मा ने बताया कि जब हम भोजन करते हैं, तो वह सीधे अमाशय (जठर) में जाकर एक पेस्ट का रूप लेता है। इसी अमाशय में जठराग्नि जलती है, जो भोजन को पचाकर शरीर के लिए आवश्यक रस, रक्त, मांस, मज्जा, मेद, अस्थि और शुक्र का निर्माण करती है। यदि इस अग्नि को ठंडे पानी से बुझा दिया जाए, तो पाचन रुक जाता है, और भोजन सड़ने (fermentation) लगता है।
उन्होंने कहा कि भोजन सड़ने से यूरिक एसिड, कोलेस्ट्रॉल (LDL, VLDL), और ट्राइग्लिसराइड्स जैसे 103 प्रकार के विष बनते हैं, जो शरीर में कई बीमारियों की जड़ होते हैं — जैसे घुटनों, कमर और कंधों का दर्द, हाई बीपी, हृदय रोग और ब्लॉकेज।
डॉ. शर्मा ने कहा कि भोजन के बाद कम से कम 1 घंटे 48 मिनट तक पानी नहीं पीना चाहिए ताकि पाचन अग्नि अपना कार्य पूर्ण कर सके। इसके बाद शरीर को पानी की आवश्यकता होती है, जिसे इच्छानुसार लिया जा सकता है। वहीं, भोजन के पहले 45 मिनट तक पानी पीना सुरक्षित माना गया है, क्योंकि यह समय पानी के शरीर में अवशोषण और उत्सर्जन की प्रक्रिया से जुड़ा है।
डॉ. शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि भोजन को पचाना अधिक आवश्यक है, न कि सिर्फ खाना। जो खाना नहीं पचता, वही शरीर में विष बनाता है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति कहे कि उसका यूरिक एसिड, कोलेस्ट्रोल या ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ा हुआ है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि उसका भोजन सही से नहीं पच रहा।
निष्कर्षतः, उन्होंने यह संदेश दिया कि यदि हम अपने स्वास्थ्य को ठीक रखना चाहते हैं, तो पानी पीने की सही समय व्यवस्था को अपनाना ही होगा। इस चिकित्सक दिवस पर उनका यह संदेश समाज के लिए एक अनमोल स्वास्थ्य उपहार के रूप में सामने आया है।


