July 25, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

खबरें जरा हट के

कल मनाया जाएगा वट सावित्री व्रत: पतिव्रता धर्म, प्रेम और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक पर्व

1 min read

 त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/  वट सावित्री व्रत, हिन्दू धर्म की परंपरा में महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला अत्यंत पुण्यदायक और श्रद्धापूर्ण पर्व है, जो इस वर्ष कल ज्येष्ठ अमावस्या तिथि को देशभर में श्रद्धा व भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना हेतु व्रत रखती हैं और वट (बरगद) वृक्ष की पूजा करती हैं।

वट सावित्री व्रत क्यों मनाया जाता है?

इस व्रत का पौराणिक आधार सावित्री और सत्यवान की कथा पर आधारित है। मान्यता है कि जब सावित्री के पति सत्यवान की मृत्यु हो गई, तब सावित्री ने अपने तप, व्रत, आस्था और दृढ़ निश्चय के बल पर यमराज से उनके प्राण वापस ले लिए। यह व्रत पतिव्रता धर्म की श्रेष्ठता और नारी के आत्मबल का प्रतीक है।

सावित्री की दृढ़ निष्ठा, पतिपरायणता और शक्ति को सम्मान देने हेतु यह व्रत किया जाता है। महिलाएं इसी श्रद्धा से यह मानती हैं कि व्रत और पूजा से उनका वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा तथा उनके पति को दीर्घायु प्राप्त होगी।

पूजा विधि:

  1. प्रातः काल स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
  2. सुहाग श्रृंगार करें और पूजन की थाली सजाएं।
  3. वट वृक्ष की जड़ में जल, रोली, हल्दी, चावल, फल, फूल और मिठाई अर्पित करें।
  4. कच्चे सूत (धागा) से वट वृक्ष की परिक्रमा करें — सामान्यतः 7, 11 या 21 बार।
  5. सावित्री-सत्यवान की कथा का श्रवण करें या स्वयं पढ़ें।
  6. अंत में सुहाग सामग्री का आदान-प्रदान कर अन्य महिलाओं को व्रत की शुभकामनाएं दें।

व्रत की विशेषताएं और सामाजिक संदेश:

  • यह पर्व केवल पति की लंबी उम्र के लिए व्रत नहीं, बल्कि नारी की श्रद्धा, आस्था और शक्ति का सार्वजनिक रूप है।
  • इस दिन वट वृक्ष की पूजा कर महिलाएं पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देती हैं, क्योंकि वट वृक्ष को जीवनदायिनी और औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है।
  • साथ ही यह पर्व महिलाओं के बीच सामूहिकता, सहयोग और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देता है।

सांस्कृतिक महत्व:

वट सावित्री व्रत न केवल धार्मिक पर्व है, बल्कि यह संस्कारों, परंपराओं और प्रकृति से जुड़ने का अवसर भी है। इस दिन महिलाएं पारंपरिक परिधान में सज-धजकर मंदिरों व वट वृक्षों के पास एकत्र होती हैं। भक्ति गीत, कथा वाचन, भजन कीर्तन का आयोजन होता है, जिससे पूरे वातावरण में श्रद्धा और सौहार्द का संचार होता है।

तैयारियों का माहौल:

व्रत को लेकर बाजारों में सुहाग सामग्रियों, पूजा की थालियों और पारंपरिक वस्त्रों की ख़रीदारी जोरों पर है। मंदिरों, सामुदायिक स्थलों और वट वृक्षों के चारों ओर साफ-सफाई व सजावट की गई है। पूजा समिति व स्थानीय महिलाओं द्वारा सामूहिक आयोजन की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं।


वट सावित्री व्रत, भारतीय नारी के त्याग, तप, प्रेम और परंपरा का वह पर्व है, जो आधुनिक समय में भी संस्कृति की जड़ों से जोड़े रखता है। यह पर्व जीवन मूल्यों, प्रकृति प्रेम और परिवार के प्रति नारी की भूमिका को उजागर करता है।

 

More Stories

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.