March 15, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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ज्येष्ठ मास में रखें आहार-विहार का विशेष ध्यान, बैंगन और लाल मिर्च से परहेज़ जरूरी: नाड़ी वैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा

 

 त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा  ****/ आयुर्वेद के अनुसार हर ऋतु और मास में शरीर की प्रकृति के अनुरूप आहार-विहार को अपनाना अत्यंत आवश्यक होता है। इसी क्रम में ज्येष्ठ (जेठ) मास जो इस वर्ष 13 मई 2025 मंगलवार से शुरू होकर 11 जून 2025 बुधवार तक रहेगा, इस दौरान कैसी दिनचर्या अपनानी चाहिए और क्या खान-पान उपयुक्त रहेगा—इस विषय में छत्तीसगढ़ प्रांत के ख्यातिलब्ध आयुर्वेद चिकित्सक एवं नाड़ी वैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।

डॉ. शर्मा ने बताया कि ज्येष्ठ माह में सूर्य की तपिश अत्यंत तीव्र होती है, जिससे न केवल वातावरण बल्कि हमारे शरीर में भी जल तत्व की कमी हो जाती है। परिणामस्वरूप शरीर में थकावट, लू लगना, पाचन तंत्र की कमजोरी और विभिन्न रोगों की आशंका बढ़ जाती है। इस दौरान खान-पान और दिनचर्या में सावधानी बरतकर इन समस्याओं से बचा जा सकता है।

क्या खाएं और क्या न खाएं?

डॉ. शर्मा के अनुसार, इस माह बेल फल, मधुर रसयुक्त फलों का सेवन अत्यंत लाभकारी होता है। आहार में सत्तू, चावल, मक्के की खीर, मौसमी फल जैसे खरबूजा, तरबूज, आम, नारियल जल, मौसंबी, संतरा आदि शामिल करें। सब्जियों में लौकी, तुरई, सहजन, ककड़ी, पालक, पुदीना जैसे शीतल प्रवृत्ति वाले पदार्थों का सेवन करें। मसालों में जीरा, धनिया, हल्दी, इलायची और पुरानी इमली जैसी चीजें उपयुक्त रहती हैं।

वहीं दूसरी ओर, ज्येष्ठ माह में बैंगन, लाल मिर्च, पपीता, मूली, टमाटर, फूल गोभी, अदरक जैसी गर्म व पित्तवर्धक चीजों से परहेज़ जरूरी बताया गया है। साथ ही अत्यधिक तेलयुक्त, मसालेदार, बासी भोजन व देर से पचने वाले गरिष्ठ आहार से भी बचना चाहिए।

दिनचर्या में क्या रखें ध्यान

सुबह जल्दी उठना, योग-प्राणायाम, ध्यान करना, दोपहर भोजन के पश्चात थोड़ी देर विश्राम करना लाभदायक है। गर्मी से बचाव के लिए धूप में जाने से बचें, या उपयुक्त बचाव उपाय जैसे छाता, कपड़ा आदि का उपयोग करें। शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए मिट्टी के घड़े या सुराही का ठंडा जल सेवन करें।

रात्रि में भोजन न करने की परंपरा को आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से सही ठहराते हुए डॉ. शर्मा ने बताया कि महाभारत में भी उल्लेख है कि “ज्येष्ठामूलं तु यो मासमेकभक्तेन संक्षिपेत्। ऐश्वर्यमतुलं श्रेष्ठं पुमान्स्त्री वा प्रपद्यते।” अर्थात जो व्यक्ति ज्येष्ठ माह में एक समय भोजन करता है वह रोगमुक्त और सुखी जीवन प्राप्त करता है।

जीवनशैली में अपनाएं ये बातें:

क्या करें:

  • जल्दी उठें, हल्का सुपाच्य भोजन करें
  • ताजे फल, रसदार पदार्थों, सत्तू का सेवन करें
  • दिन में विश्राम करें
  • पर्याप्त पानी पीएं
  • योग, प्राणायाम और हल्का व्यायाम करें

क्या न करें:

  • सुबह देर तक न सोएं
  • धूप में न जाएं या उचित बचाव न करें
  • मसालेदार, भारी, तामसिक भोजन न करें
  • रात्रि में जागरण न करें

डॉ. नागेंद्र शर्मा ने ज्येष्ठ मास को आत्मचिंतन, शारीरिक संतुलन और प्रकृति के साथ सामंजस्य का समय बताया है। उन्होंने कहा कि अगर हम ऋतुचर्या का पालन करें तो बहुत सी बीमारियों से सहज ही बचा जा सकता है।

 

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