एक भारत नाम का किसान था। उसके साथ उसके बेटे थे।



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा वे बहुत मेहनती और ईमानदार थे। बस अगर कोई बुरी बात थी तो यह कि उनका आपस में झगड़ा ही होता रहता था। वे किसी बात पर आपस में सहमत नहीं होते थे। यह सब देख उनका पिता बहुत दुखी होता था।
एक बार
भारत ने अपने बेटों को बुलाया और उन्हें बारी-बारी से गट्ठर तोड़ने को दिया। कोई भी उसे नहीं तोड़ सका। उसके बाद किसान ने उस गट्ठर को खोल कर सबको एक एक लकड़ी दी और तोड़ने को कहा। इस बार सबने झट से अपनी-अपनी लकड़ी तोड़ दी।
तब किसान ने सब को समझाया – ” देखो ! जब मैने तुम सब को यह गट्ठर तोड़ने को दिया तो कोई भी इसे तोड़ नहीं पाया। लेकिन जैसे ही उसे अलग करके एक-एक लकड़ी दी तो उसे सब ने आसानी से तोड़ दिया। ऐसे ही अगर तुम सब मिल कर रहोगे तो हर मुसीबत का मुकाबला कर सकते हो, जो अलग-अलग रह कर नहीं कर सकते।
यह बात भारत के बेटों की समझ में आ गई और फिर सब मिल जुल कर रहने लगे। भारत भी बहुत खुश हुआ।
इसलिए कहते हैं – ” एकता में बहुत बल होता है। “

