July 25, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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त्रिनेत्र टाइम्स   कोरबा  सार्वजनिक क्षेत्र के वृहद उपक्रम कोल् इंडिया के अधीन संचालित एसईसीएल बिलासपुर की कोरबा-पश्चिम क्षेत्र में स्थापित खुले मुहाने की गेवरा कोयला परियोजना अंतर्गत एसईसीएल की मेगा प्रोजेक्ट कुसमुंडा परियोजना में आउटसोर्सिंग के काम विभिन्न ठेका कंपनियों को मिले हुए हैं। इनमें प्रभावित भू-विस्थापितों ने दूसरे राज्य के लोगों को यहां पर काम देने को लेकर आपत्ति दर्ज कराई। इन लोगों ने मांग की है कि प्रावधान के अंतर्गत उन्हें यहां पर काम मिलना चाहिए।
कुसमुंडा परियोजना में ओवर बर्डन से लेकर ट्रांसपोर्टिंग और दूसरे कार्यों को आउटसोर्सिंग पर दिया गया है। ग्लोबल टेंडर के आधार पर एसईसीएल की इस परियोजना में नीलकंठम नामक निजी ठेका कंपनी को जिम्मेदारी मिली है। उन्होंने अपना कामकाज करने के लिए श्रमिकों की नियुक्ति की है। इस मामले में स्किल पर जोर देने की कोशिश की गई है।
इसी बात को लेकर यहाँ आए दिन विवाद खड़ा हो रहा है और गतिरोध भी उत्पन्न हो रहा है। एसईसीएल कुसमुंडा के आसपास के प्रभावित गांवों के कई लोगों ने उसके कैंप पर धावा बोलने के साथ वहां पर काम करने वाले श्रमिकों से पूछताछ की। इन लोगों ने आरोप लगाया हैं कि रोजगार मांगने पर उनकी ऋण पुस्तिका और कई दस्तावेज ले लिए गए हैं और चक्कर कटवाए जा रहे हैं।
भू-स्थापितों का कहना है कि काफी लंबे समय से निजी कंपनी द्वारा उन्हें गुमराह किया जा रहा है और बाहरी लोगों को लाकर कम कराया जा रहा है, जबकि उनसे सारे दस्तावेज कंपनी ले चुकी है। उसके बावजूद भी कम पर रखने के लिए आनाकानी कर रही है।
छत्तीसगढ़ सरकार के श्रम और उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन के द्वारा हाल में ही विभिन्न सार्वजनिक प्रतिष्ठानों से यह जानकारी देने को कहा गया है कि उनके यहां कॉन्ट्रैक्ट संबंधी कार्यों में स्थानीय लोग किस संख्या में हैं और दूसरे राज्यों के लोगों को कितनी मात्रा में रोजगार दिया गया है। 7 दिन के अंदर इस प्रकार की जानकारी देने के लिए निर्देशित किया गया है।

 

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