January 22, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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कोरबा दिवाली को लेकर शहरी व उपनगर क्षेत्र में पटाखों की दुकानें लग गई हैं, जहां लोग पटाखे खरीदने पहंुचने लगे हैं। पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए एनजीटी व सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हरित पटाखों की बिक्री होनी है, लेकिन लोेग उत्साह में ऐसे पटाखों की खरीदारी करने के बजाय प्रतिबंधित पटाखों को ज्यादा खरीदते हैं।जबकि प्रतिबंधित पटाखों से न केवल हमारा पर्यावरण प्रदूषित होता है वरन इसका स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ता है। बावजूद इसके पटाखा दुकानों में हरित पटाखे कम और ध्वनि प्रदूषण करने वाले पटाखे अधिक बिक रहे हैं। इस पर रोक नहीं लगाई जा सकी है। दूसरी ओर प्रदूषण के प्रति जागरुक लोग सेहत को ध्यान में रख ग्रीन पटाखा खरीदने पर जोर दे रहे हैं। बच्चों के स्वास्थ्य को रहने वाले नुकसान से बचाने के लिए ग्रीन पटाखों का प्रचलन काफी बढ़ गया है, पर बाजार में ग्रीन बताया जा रहा हर पटाखा ग्रीन नहीं है। नगर में लगी पटाखा की दुकानों में बिक रहे पटाखों की जांच की गई तो बेहद चिंताजनक बात सामने आई कि काउंसिल अॉफ इंडस्ट्रियल रिसर्च के नेशनल एन्वायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएसआईआर-एनईईआरआई) के मोबाइल एप से स्कैन करने अधिकतर पैकेट पर लगे क्यूआर कोड अमान्य मिले। यानी वे पटाखे न तो ग्रीन की श्रेणी में हैं और न ही उन्हें निर्माण करने वाली कंपनी का कोई अता पता है। कुछ के क्यूआरकोड में निर्माण कंपनी की जानकारी मिली पर वे ग्रीन की श्रेणी में नहीं थे। बाजार में बिकने के लिए दुकान के बाहर सजाकर रखे गए ग्रीन पटाखे, इनमें नकली भी शामिल हैं। 80 प्रतिशत पैकेट से मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट भी गायब बिक रहे पटाखों में से 50 प्रतिशत क्यूआर कोड अंकित नहीं हैं। वहीं 80 प्रतिशत पर पटाखों के पैकेट पर मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट अंकित नहीं है। यहां तक कि मूल्य भी पटाखों के पैकेट पर नहीं है। वहीं कई असली ग्रीन पटाखे भी एक्सपायरी डेट के बाद बेचे जा रहे हैं। दुकानदारों के अनुसार ज्यादातर पटाखे बिलासपुर से लाकर बेचते हैं। इस तरह से जांच कर करें ग्रीन पटाखों की जानकारी मोबाइल एप से पैकेट पर लगे क्यूआरकोड को स्कैन करने पर पटाखे में उपयोग की गई सामग्री समेत समस्त जानकारी प्राप्त की जा सकती है। सही ग्रीन पटाखा हुआ तो स्कैनर पर एक वेबसाइट दिखेगा, जिसे खोलने पर निर्माण करने वाली कंपनी, लाइसेंस समेत निर्माण तथा एक्सपायरी डेट का पता चल जाएगा। अगर पटाखा नकली और ग्रीन नहीं हुआ तो क्यूआरकोड इनवैलिड बताएगा। सामान्य पटाखों से हवा में बढ़ता है पीएम का स्तर शोध के अनुसार 1000 मिर्ची पटाखे की चटाई जलाने पर पीएम 2.5 का स्तर 47789 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच जाता है। एक लरी जलाने से हवा में पीएम 2.5 का सत्र 34068 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर व एक फुलझड़ी जलाने पर हवा में 10898 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पीएम 2.5 का स्तर पहुंच जाता है। बढ़ा पीएम स्तर सासों में तकलीफ के साथ फेफड़ों के साथ ही पूरे शरीर पर बहुत बुरा असर करता है।

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