January 21, 2026

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कोरबा चेतक हाथी को काबू करने कुमकी हाथी को बुलाने वन विभाग ने मांगी अनुमति

 


चेतक हाथी कटघोरा वनमंडल में ले चुका है 4 लोगों की जान
कोरबा जिले के कटघोरा वनमंडल में विचरण कर रहे चेतक हाथी ने एक सप्ताह के भीतर चार लोगों को मौत के घाट उतार दिया हैं। जिसके बाद से लगातार क्षेत्र में उत्पात मचा रहा है। वन विभाग के अधिकारी व ट्रैकरों की टीम लगातार उसके उत्पात को रोकने में प्रयास में जुटी हुई है। इसके बाद भी कोई ठोस सफलता नहीं मिल रहा पा रही है। बताया जाता है कि चेतक के आक्रामक रुख व खतरे को देखते हुए वन विभाग द्वारा पीसीसी वाइल्ड लाइफ को पत्र लिखकर चेतक को कंट्रोल करने के लिए कुमकी हाथी मंगाने की दिशा पर पहल की जा रही है। हालांकि अभी इसकी अनुमति नहीं मिली है।
कटघोरा वनमंडल में हाथियों को उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है। खासतौर पर चेतक हाथी सबसे अधिक उत्पात मचा रहा है जिसे रोकने के लिए वन विभाग के वनमंडलाधिकारी कुमार निशांत अपने टीम के साथ लगातार ड्रोन कैमरा व ट्रैकरो के साथ प्रयास में जुटे हुए हैं ताकि अब कोई जनधन की हानि ना हो लेकिन इसके बाद भी लगातार जंगल में खतरा बना हुआ है।
वन विभाग के सूत्र बताते हैं कि चेतक हाथी को कंट्रोल करने के लिए तैमूर पिंगला से कुमकी हाथी मंगाने के लिए पीसीसी वाइल्ड लाइफ को पत्र लिखकर रेस्क्यू करने की अनुमति मांगी है। यदि पीसीसी वाइल्डलाइफ से इसकी अनुमति मिलती है तो आने वाले कुछ दिनों में जल्द ही चेतक हाथी व कुमकी के बीच द्वंद होगा और उसे उसके झुण्ड से मिलाने का प्रयास होगा यदि इसके बाद भी बात नहीं बनी तो चेतक हाथी का रेस्क्यू कर उसे तैमूरपिंगला रेस्क्यू सेंटर भेजने पर भी विचार किया जा सकता है। हालांकि वन विभाग के अधिकारी भी इस मामले को लेकर कुछ भी कहने में कतरा रहे हैं। अभी वन विभाग चेतक को कंट्रोल कर झुण्ड से मिलाने का प्रयास कर रही है ताकि आने वाले दिनों में कुमकी हाथी बुलाने या रेस्क्यू करने की आवश्यकता ना पड़े। बिलासपुर व राजधानी के वन विभाग के अफसर भी चेतक के हर गतिविधियों की रिपोर्ट ले रहे हैं और नजरें जमाए हुए हैं।
पूर्व में कोरबा व कटघोरा वनमंडल में हाथियों को कंट्रोल करने के लिए कुमकी हाथियों को तैमूरपिंगला से बुलाया जा चुका है। गणेश नामक दंतैल हाथी को रेस्क्यू करने के लिए पूर्व में कुदमुरा में कुमकी हाथी और गणेश के बीच आमना-सामना हुआ था। जहां वन विभाग गणेश का सुरक्षित रेस्क्यू करने में कामयाब हुई थी। इसी तरह अब फिर से चेतक को कंट्रोल करने के लिए कुमकी हाथी का सहारा लेने की दिशा पर प्रयास किया जा रहा है। बताया जाता है कि पीसीसी वाइल्डलाइफ से इसकी अनुमति मिलने के बाद तेमूरपिंगला कुमकी हाथी का एक दल कटघोरा पहुंचेगा।
कुमकी का उपयोग जंगली हाथियों को पकड़ने, शांत करने, चराने के लिए या संघर्ष की स्थिति में जंगली हाथियों को दूर ले जाने के लिए किया जाता है। कुमकी वह हाथी नहीं हैं जो भारतीय मंदिरों में व्यापक रूप से पाए जाते हैं। यह शब्द विशेष रूप से प्रशिक्षित मादा हाथियों के लिए प्रयोग किया जा सकता है जिनका उपयोग प्रलोभन के रूप में किया जाता है। कुमकियों को विशेषज्ञ महावतों द्वारा प्रशिक्षित किया जाता है, जिनमें से कुछ कट्टुनायिका आदिवासी समुदाय से हैं जिन्हें जंगली हाथियों के बारे में गहन ज्ञान और समझ के लिए जाना जाता है। कुमकी अन्य बंदी हाथियों के समान नहीं हैं।

 

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