विश्व ब्रेल दिवस : दृष्टिबाधितों की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और समान अधिकारों का सशक्त प्रतीक






त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****// कोरबा, 04 जनवरी।
हर वर्ष 4 जनवरी को मनाया जाने वाला विश्व ब्रेल दिवस दृष्टिबाधित एवं नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में शिक्षा, सूचना और संचार के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली ब्रेल लिपि के महत्व को रेखांकित करता है। यह दिवस न केवल एक स्मरणोत्सव है, बल्कि समाज को समावेशी, संवेदनशील और समान अवसरों से युक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी है। यह दिन ब्रेल लिपि के महान आविष्कारक लुई ब्रेल की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है, जिन्होंने अत्यंत कम आयु में इस स्पर्शनीय लिपि का आविष्कार कर दृष्टिबाधितजनों को आत्मनिर्भरता का मार्ग दिखाया।
ब्रेल लिपि दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए केवल पढ़ने-लिखने का माध्यम नहीं, बल्कि ज्ञान, आत्मसम्मान और स्वावलंबन की कुंजी है। इसके माध्यम से नेत्रहीन व्यक्ति शिक्षा प्राप्त कर अपने अधिकारों को समझते हैं, समाज में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाते हैं और आत्मविश्वास के साथ जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ते हैं। आज ब्रेल लिपि पुस्तकों, शैक्षणिक सामग्री, सरकारी सूचनाओं, संकेतकों और तकनीकी संसाधनों के रूप में दृष्टिबाधितजनों के लिए एक सशक्त सहारा बनी हुई है।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व ब्रेल दिवस मनाने का उद्देश्य दृष्टिबाधित एवं नेत्रहीन व्यक्तियों के मानवाधिकारों की रक्षा, समान अवसरों की उपलब्धता और सामाजिक समावेशन के प्रति वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाना है। यह दिवस समाज को यह संदेश देता है कि दिव्यांगता कोई बाधा नहीं, बल्कि सहयोग और समावेश के माध्यम से हर व्यक्ति समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकता है।
इस अवसर पर समाज के प्रत्येक नागरिक, संस्थान और प्रशासन से यह अपेक्षा की जाती है कि वे दृष्टिबाधितजनों के प्रति सहयोग, संवेदनशीलता और सम्मान की भावना विकसित करें। सार्वजनिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों और कार्यस्थलों पर ब्रेल सुविधाओं को बढ़ावा देकर एक ऐसा वातावरण तैयार किया जाए, जहाँ दृष्टिबाधित व्यक्ति बिना किसी बाधा के अपने सपनों को साकार कर सकें।
अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह, कोरबा (छत्तीसगढ़) ने विश्व ब्रेल दिवस के अवसर पर कहा कि एक समावेशी समाज का निर्माण तभी संभव है, जब हम दृष्टिबाधितजनों को दया की दृष्टि से नहीं, बल्कि समान अधिकारों और अवसरों के साथ सम्मानजनक स्थान दें। ब्रेल लिपि इसी समानता और आत्मनिर्भरता की सबसे सशक्त अभिव्यक्ति है।
विश्व ब्रेल दिवस हम सभी को यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि हम दृष्टिबाधितजनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलें, उनके अधिकारों की रक्षा करें और एक ऐसे समाज का निर्माण करें, जहाँ हर व्यक्ति अपनी क्षमताओं के बल पर आगे बढ़ सके।





