राधा-नाम की अनवरत गूंज में अंग्रेजी नववर्ष 2025 को भावपूर्ण विदाई, 2026 का अलौकिक अभिनंदन फोगला आश्रम, श्रीधाम वृंदावन में कथा विश्राम उपरांत रात्रि 10:30 बजे से महासंकीर्तन, भक्ति-नर्तन में डूबा वृंदावन






त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** कोरबा वृंदावन धाम
अंग्रेजी नववर्ष के संधिकाल पर जहाँ देशभर में उत्सव आधुनिक रंगों में मनाया गया, वहीं श्रीधाम वृंदावन स्थित फोगला आश्रम में नववर्ष का स्वागत एक अद्भुत, अलौकिक और आत्मिक परंपरा के साथ किया गया। यहाँ अंग्रेजी नववर्ष 2025 को भक्ति भाव से विदाई दी गई और नववर्ष 2026 का अभिनंदन राधा-कृष्ण नाम-स्मरण, संकीर्तन और साधना के साथ हुआ।


फोगला आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का प्रथम पाठ कथा व्यास श्रीहित ललितवल्लभ नागर जी की अमृतवाणी से संपन्न हुआ। कथा का विश्राम सायं 7:30 बजे हुआ, जिसके उपरांत आश्रम परिसर श्रद्धा और शांति के भाव में डूब गया। कथा के प्रत्येक प्रसंग ने श्रोताओं के हृदय को स्पर्श किया और भक्ति-चेतना का ऐसा प्रवाह बहा कि उपस्थित श्रद्धालु स्वयं को वृंदावन की रसलीला में अनुभव करने लगे।
कथा विश्राम के पश्चात रात्रि का समय जैसे-जैसे आगे बढ़ा, वैसे-वैसे भक्तों की प्रतीक्षा राधा-नाम संकीर्तन के लिए और प्रगाढ़ होती चली गई। रात्रि ठीक 10:30 बजे आश्रम परिसर में जब मृदंग और करताल की प्रथम ध्वनि गूंजी, तो मानो संपूर्ण वृंदावन जाग उठा। “राधे-राधे” के जयघोष के साथ प्रारंभ हुआ यह महासंकीर्तन देखते ही देखते भक्ति का महासागर बन गया।
राधा नाम के उच्चारण मात्र से वातावरण इतना भावमय हो उठा कि संत, साधक, भक्त, महिला-पुरुष, युवा-वृद्ध सभी भक्ति-नर्तन में लीन हो गए। कोई अश्रुपूरित नेत्रों से राधा रानी को निहार रहा था, तो कोई आनंदातिरेक में हाथ उठाकर नृत्य कर रहा था। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं श्रीधाम वृंदावन नववर्ष 2026 के स्वागत में राधा नाम पर झूम उठा हो।
यह आयोजन केवल एक कीर्तन नहीं, बल्कि अंग्रेजी नववर्ष 2025 को आध्यात्मिक विदाई और 2026 को दिव्यता के साथ आमंत्रण देने का अनुपम उदाहरण बना। जहाँ संसार शोर और आतिशबाजी में नया साल मनाता है, वहीं फोगला आश्रम में नाम-स्मरण, प्रेम और भक्ति के साथ नववर्ष का अभिनंदन किया गया। श्रद्धालुओं ने प्रभु से प्रार्थना की कि आने वाला वर्ष जीवन में शांति, सद्भाव, संयम और सेवा लेकर आए।
इस अवसर पर कथा व्यास श्रीहित ललितवल्लभ नागर जी ने कहा कि,

“नववर्ष का वास्तविक उत्सव तब होता है, जब हम अपने मन को प्रभु चरणों में स्थिर करें। राधा नाम वह दिव्य शक्ति है, जो जीवन के हर क्लेश को प्रेम में परिवर्तित कर देती है।”
रात्रि देर तक चला यह राधा नाम संकीर्तन आश्रम परिसर को भक्ति-ऊर्जा से भरता रहा। श्रद्धालुओं का कहना था कि उन्होंने ऐसा नववर्ष पहले कभी नहीं देखा—जहाँ समय बदला नहीं, बल्कि चेतना ने नया स्वरूप ग्रहण किया; जहाँ तिथि नहीं, बल्कि आत्मा ने नवजीवन पाया।
निस्संदेह, फोगला आश्रम, श्रीधाम वृंदावन में मनाया गया यह नववर्ष उत्सव आने वाले समय तक श्रद्धालुओं के हृदय में राधा-नाम की मधुर स्मृति बनकर जीवित रहेगा और यह संदेश देगा कि
नववर्ष का सबसे सुंदर स्वागत—प्रभु के नाम, प्रेम और भक्ति में ही निहित है।





