ग्राम साखो में एकल अभियान देवपहरी की उप-संच स्तरीय सत्संग प्रतियोगिता संपन्न, प्रतिभागियों ने दिखाई सांस्कृतिक व आध्यात्मिक प्रतिभा






त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा *****// कोरबा | देवपहरी।
स्वयंसेवी संस्था एकल अभियान देवपहरी के मार्गदर्शन में उप-संच स्तर की सत्संग प्रतियोगिता का आयोजन दिनांक 25 दिसंबर को विद्यालय परिसर, ग्राम साखो में श्रद्धा, अनुशासन एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह प्रतियोगिता श्री हरि सत्संग समिति के तत्वावधान में आयोजित की गई, जिसमें ग्रामीण अंचल की सत्संग मंडलियों ने अपनी आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता की निर्धारित रूपरेखा के अनुसार, प्रत्येक संच केंद्र के अंतर्गत तीन उप-संच स्तर पर प्रतियोगिताएँ आयोजित की जा रही हैं। प्रत्येक उप-संच से चयनित तीन-तीन श्रेष्ठ मंडलियाँ आगे संच केंद्र स्तर पर होने वाली फाइनल प्रतियोगिता में भाग लेंगी। इस प्रकार कुल 9 मंडलियों के बीच संच स्तरीय मुकाबला होगा, जिसमें से 3 उत्कृष्ट मंडलियों का चयन जिला स्तर की प्रतियोगिता हेतु किया जाएगा।
आज की उप-संच स्तरीय प्रतियोगिता बंजारीडांड उप-संच अंतर्गत आयोजित की गई, जिसमें विद्यालय ग्राम साखो की आयोजन समिति का सराहनीय सहयोग रहा। आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय कार्यकर्ताओं एवं समिति सदस्यों की सक्रिय भूमिका उल्लेखनीय रही।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संच समिति सचिव श्री कृष्णा कुमार कंवर उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता संच संस्कार समिति के अध्यक्ष श्री सीताराम देवांगन ने की।
प्रतियोगिता के निष्पक्ष एवं सुव्यवस्थित मूल्यांकन हेतु निर्णायक समिति में श्री अमृतलाल रौतिया, श्री बीर सिंह सहित संच समिति के अन्य सदस्यों की महत्वपूर्ण सहभागिता रही।
प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने भक्ति, संस्कार और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से ओत-प्रोत सत्संग प्रस्तुत कर उपस्थितजनों को मंत्रमुग्ध कर दिया। परिणाम इस प्रकार रहे—
🥇 प्रथम स्थान – समेलाल मंझवार, गढ़ बसाहट की मंडली
🥈 द्वितीय स्थान – धीरपाल
🥉 तृतीय स्थान – ठाकुर देव मानस मंडली
पूरे कार्यक्रम का संचालन श्री हरि सत्संग समिति की सुव्यवस्थित एवं अनुशासित प्रणाली के अंतर्गत किया गया। कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के साथ श्रद्धा, भक्ति और उल्लासपूर्ण वातावरण में हुआ।
आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार की सत्संग प्रतियोगिताएँ ग्रामीण समाज में संस्कार, भक्ति, अनुशासन एवं सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और बच्चों-युवाओं में नैतिक मूल्यों के विकास का सशक्त माध्यम हैं।





