February 11, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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ऐतिहासिक फैसला: पुलिस थानों में स्टिंग करने वाले पत्रकारों को हाईकोर्ट से सुरक्षा, किसी भी कार्रवाई पर सख्त रोक

 

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा *****/ सागर (मध्य प्रदेश)।
मध्य प्रदेश में खोजी पत्रकारिता और प्रेस स्वतंत्रता के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला निर्णय सामने आया है। सागर जिले के पुलिस थानों में कथित अवैध गतिविधियों को उजागर करने वाले तीन पत्रकारों को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की दमनात्मक या दबावपूर्ण कार्रवाई पर रोक लगा दी है। यह पहला अवसर माना जा रहा है जब स्टिंग ऑपरेशन के बाद पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट ने इतना स्पष्ट, सख्त और व्यापक हस्तक्षेप किया है।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की सिंगल बेंच, न्यायमूर्ति श्री हिमांशु जोशी ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान पत्रकारों को तत्काल संरक्षण प्रदान करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि याचिकाकर्ता रिपोर्टरों के खिलाफ कोई भी coercive action (दमनात्मक कार्रवाई) नहीं की जाएगी। न्यायालय ने इस मामले में प्रदेश के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), गृह विभाग एवं विधि विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को भी नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता पत्रकारों की ओर से बताया गया कि 30 नवंबर 2025 को दैनिक भास्कर में प्रकाशित एक स्टिंग रिपोर्ट में सागर जिले के कुछ थाना क्षेत्रों में पुलिस की कथित संदिग्ध और अवैध गतिविधियों का खुलासा किया गया था। इस रिपोर्ट के प्रकाशन के बाद पत्रकारों को आशंका व्यक्त की गई कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाकर गिरफ्तारी या अन्य दमनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
इसी आशंका के चलते पत्रकारों ने उच्च न्यायालय की शरण ली। याचिका में सागर रेंज की आईजी हिमानी खन्ना, सागर एसपी विकास सहवाल सहित जिले के चार थाना प्रभारियों को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाया गया, जिससे मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता और अधिक बढ़ गई।
सुनवाई के दौरान न्यायालय की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने स्टिंग रिपोर्ट की सामग्री का अवलोकन किया और प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए पत्रकारों को तत्काल राहत प्रदान की। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि स्टिंग करने वाले रिपोर्टरों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की जाएगी, जब तक अगली सुनवाई में विस्तृत पक्ष नहीं सुना जाता।
मुख्य आदेश और उसका प्रभाव
पुलिस थानों में किए गए स्टिंग ऑपरेशन के बाद पत्रकारों को सुरक्षा का अधिकार सुनिश्चित किया गया।
प्रदेश के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम उठाया गया।
सीबीआई को नोटिस जारी कर यह संकेत दिया गया कि यदि आवश्यक हुआ तो मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच पर भी विचार किया जा सकता है।
मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी 2026 को निर्धारित की गई है।
प्रदेशव्यापी असर और विशेषज्ञों की राय
कानूनी और मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश केवल सागर जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में खोजी पत्रकारिता और स्टिंग-आधारित रिपोर्टिंग के लिए नजीर (मिसाल) बनेगा। यह फैसला पत्रकारों को यह भरोसा देता है कि भ्रष्टाचार या अनियमितताओं को उजागर करने पर उन्हें प्रशासनिक प्रतिशोध का सामना नहीं करना पड़ेगा।
आगामी संभावित बदलाव
पुलिस थानों में स्टिंग रिपोर्ट सामने आने के बाद तत्काल एफआईआर या गिरफ्तारी पर न्यायिक निगरानी बढ़ सकती है।
मीडिया संगठनों और पत्रकारों के लिए संवेदनशील संस्थानों में रिपोर्टिंग के दौरान सुरक्षा एवं वैधानिक प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट प्रोटोकॉल बनाए जाने की आवश्यकता और अधिक महसूस की जाएगी।
यह फैसला प्रेस की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आज़ादी और पत्रकारों की व्यक्तिगत सुरक्षा के संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का यह आदेश न केवल तीन पत्रकारों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया की भूमिका को सुदृढ़ करने वाला एक ऐतिहासिक और साहसिक न्यायिक कदम माना जा रहा है।

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