बरपाली महाविद्यालय में जनजाति गौरव दिवस का भव्य आयोजन, संस्कृति, परंपरा और गौरव का संगम बना आयोजन






त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/बरपाली कोरबा शासकीय बरपाली महाविद्यालय में आज जनजाति गौरव दिवस बड़े ही हर्षोल्लास, सांस्कृतिक गरिमा और पारंपरिक विविधताओं के साथ मनाया गया। यह आयोजन जनजातीय समाज की समृद्ध विरासत, गौरवशाली इतिहास, संघर्षों और अतुलनीय योगदानों को समर्पित रहा। पूरे महाविद्यालय परिसर को जनजातीय रंगों, प्रतीकों, चित्रों और पारंपरिक सजावट से अलंकृत किया गया, जिसने कार्यक्रम को अत्यंत आकर्षक और भव्य स्वरूप प्रदान किया।
दीप प्रज्ज्वलन से हुआ शुभारंभ, गूंजे लोकनृत्य और लोकगीत
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं स्वागत गीत के साथ हुआ। इसके पश्चात छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किए गए जनजातीय लोकनृत्यों — सरहुल, पंथी, गोंडी एवं करमा नृत्य — ने उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया। ढोल, मांदर और नगाड़ों की थाप पर थिरकते कदमों ने पूरे वातावरण को उल्लास और ऊर्जा से भर दिया।
इसके साथ ही जनजातीय लोकगीतों की मधुर प्रस्तुतियों ने छत्तीसगढ़ और भारत की लोकसंस्कृति से सभी को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।

प्रदर्शनी में दिखी जनजातीय जीवन की झलक
समारोह के दौरान महाविद्यालय परिसर में जनजातीय आभूषण, पारंपरिक वेशभूषा, हस्तशिल्प, वनज उत्पाद, औजार एवं सांस्कृतिक प्रतीकों की भव्य प्रदर्शनी भी लगाई गई। छात्र-छात्राओं ने अपने सृजनात्मक कौशल से जनजातीय जीवनशैली से जुड़ी वस्तुओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया, जिसे देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी।
छत्तीसगढ़िया व्यंजनों ने बढ़ाई आयोजन की रौनक
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़िया व्यंजनों — जैसे चीला, फरा, भाजी, बोरे बासी, देसी मिठाइयाँ — की विशेष व्यवस्था की गई थी। पारंपरिक स्वाद और खुशबू ने उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध खाद्य संस्कृति से रूबरू कराया। सभी ने इन व्यंजनों का भरपूर आनंद लिया।
मुख्य अतिथियों के प्रेरणादायी संबोधन
बिरसा मुंडा के संघर्षों से मिली प्रेरणा — जुडावन सिंह ठाकुर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री जुडावन सिंह ठाकुर ने महान जननायक, जल-जंगल-जमीन के रक्षक बिरसा मुंडा के जीवन और संघर्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार बिरसा मुंडा ने अत्याचार, अन्याय और शोषण के विरुद्ध आवाज उठाकर जनजातीय समाज को नई चेतना और दिशा प्रदान की।
जनजातीय जीवन दर्शन और आधुनिक चुनौतियाँ — मनोज झा
विशिष्ट अतिथि श्री मनोज झा ने जनजातीय समाज की सरलता, सामूहिकता, आपसी सहयोग और प्रकृति केंद्रित जीवन-दर्शन पर गहन विचार साझा किए। उन्होंने युवाओं को शिक्षा, रोजगार, डिजिटल माध्यमों और तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश से उत्पन्न चुनौतियों की जानकारी देते हुए उनसे निपटने के व्यावहारिक उपाय भी बताए।
वीर नारायण सिंह की गाथा ने जगाया देशप्रेम — प्रवीण उपाध्याय
प्रवीण उपाध्याय ने छत्तीसगढ़ के शौर्य प्रतीक शहीद वीर नारायण सिंह की वीरता और बलिदान की प्रेरक गाथा विद्यार्थियों को सुनाई। उनके ओजस्वी वक्तव्य ने छात्र-छात्राओं में देशभक्ति, साहस और सामाजिक कर्तव्य की भावना को प्रबल कर दिया।
महाविद्यालय परिवार की गरिमामय उपस्थिति
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य श्री नन्द सर, श्री मीरझा सर, श्री सिंह सर, श्री चंद्रा सर, अग्रवाल सर, तांब्रे सर सहित सभी प्राध्यापकगण एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे। सभी ने कार्यक्रम की सफलता की सराहना करते हुए विद्यार्थियों के उत्साह, प्रतिभा और अनुशासन की प्रशंसा की।
छात्र-छात्राओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता बनी आयोजन की पहचान
पूरे कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने नृत्य, गायन, प्रदर्शनी, वेशभूषा एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में अत्यंत सक्रिय सहभागिता निभाई। उनकी प्रस्तुतियों, आत्मविश्वास और सृजनात्मकता ने जनजाति गौरव दिवस को अविस्मरणीय बना दिया।
यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि जनजातीय संस्कृति के सम्मान, संरक्षण और प्रचार का सशक्त संदेश भी लेकर आया, जिसने सभी को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा दी।





