February 12, 2026

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“लौह पुरुष” सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती आज — राष्ट्रीय एकता के प्रतीक को नमन

 

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/  कोरबा/रायपुर, 31 अक्टूबर 2025।
आज पूरे देश में “लौह पुरुष” और “भारत के एकीकरण के शिल्पकार” के रूप में विख्यात सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती बड़े हर्ष और श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है। स्वतंत्र भारत की एकता, अखंडता और प्रशासनिक व्यवस्था की मजबूत नींव रखने वाले इस महान नेता के प्रति आज देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम, रन फॉर यूनिटी रैली, संगोष्ठियाँ और विविध आयोजन हो रहे हैं।
भारत सरकार द्वारा 2014 से 31 अक्टूबर को “राष्ट्रीय एकता दिवस” (National Unity Day) के रूप में मनाया जाता है, ताकि देशवासियों में सरदार पटेल के विचारों और राष्ट्र के प्रति उनकी दृढ़ प्रतिबद्धता को याद किया जा सके।
जीवन परिचय और योगदान
सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नाडियाद में हुआ था। उनके पिता झवेरभाई एक साधारण किसान थे और माता लाडबाई धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं। बचपन से ही वल्लभभाई में दृढ़ इच्छाशक्ति और नेतृत्व के गुण दिखाई देते थे।
उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा अपने गाँव से प्राप्त की और बाद में कानून की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए। वहां से वकालत में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर लौटने के बाद उन्होंने अहमदाबाद में वकालत प्रारंभ की। लेकिन जल्द ही वे महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित हुए और स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े।
स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने खेड़ा सत्याग्रह (1918), बारडोली सत्याग्रह (1928) और नमक सत्याग्रह जैसे आंदोलनों का नेतृत्व किया।
बारडोली आंदोलन की सफलता के बाद उन्हें जनता ने “सरदार” की उपाधि दी। उन्होंने किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों को संगठित कर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जनशक्ति का अद्भुत प्रदर्शन किया।
भारत के एकीकरण के शिल्पकार
स्वतंत्रता के बाद जब देश में 562 रियासतें थीं, तब उनके एकीकरण का कठिन कार्य सरदार पटेल ने अपने दृढ़ निश्चय, कूटनीति और साहस से पूरा किया।
उन्होंने हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर जैसी जटिल रियासतों को भी भारत में विलय कराया। उनके इस अद्वितीय कार्य के कारण उन्हें “भारत का लौह पुरुष” कहा गया।
प्रशासनिक कुशलता और संगठन क्षमता
भारत के पहले गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने देश की प्रशासनिक व्यवस्था को एक रूप दिया। उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) जैसी संस्थाओं की नींव रखी, जो आज भी भारतीय शासन व्यवस्था की रीढ़ हैं।
सम्मान और विरासत
सरदार पटेल का निधन 15 दिसंबर 1950 को हुआ, परंतु उनके विचार और कार्य आज भी देश को एकता के सूत्र में बांधे हुए हैं।
गुजरात के केवड़िया में निर्मित “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” (Statue of Unity) — जो विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा (182 मीटर) है — उनके प्रति राष्ट्र की श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है।
एकता का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि “सरदार पटेल ने जो भारत को एक सूत्र में पिरोया, वह केवल भौगोलिक एकीकरण नहीं, बल्कि भावनात्मक एकता का प्रतीक था। हमें उनके दिखाए रास्ते पर चलकर एक सशक्त, एकजुट और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना है।”
देशभर के सभी राज्य मुख्यालयों, जिलों और शैक्षणिक संस्थानों में आज “रन फॉर यूनिटी”, एकता प्रतिज्ञा समारोह, निबंध प्रतियोगिताएं और विचार गोष्ठियाँ आयोजित की जा रही हैं।
सरदार पटेल का जीवन समर्पण, अनुशासन और राष्ट्रनिष्ठा का अद्भुत उदाहरण है। उनका यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है —
“देश की एकता और अखंडता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।”

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