जनजाति सुरक्षा मंच की संगोष्ठी में गूँजी ‘डीलिस्टिंग’ की मांग — बाबा कार्तिक उरांव की श


त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ***/ रायपुर, 30 अक्टूबर 2025।
जनजातीय समाज के महान शिक्षाविद, राष्ट्रनायक और समाजसेवी बाबा कार्तिक उरांव जी की जन्म शताब्दी के अवसर पर जनजाति सुरक्षा मंच द्वारा रोहणीपुरम स्थित शबरी कन्या आश्रम में एक गरिमामयी संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर समाज के प्रबुद्ध जन, शिक्षाविद, प्रशासनिक अधिकारी, युवा एवं महिला प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान बाबा कार्तिक उरांव जी के जीवन, उनके संघर्ष, समाज सुधार के कार्यों और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को स्मरण किया गया। वक्ताओं ने कहा कि बाबा उरांव ने जनजातीय समाज को आत्मसम्मान, शिक्षा और संगठन का मार्ग दिखाया था, और उनका जीवन पूरी तरह समाज के उत्थान के लिए समर्पित रहा।
अरविंद नेताम बोले – डीलिस्टिंग जरूरी, ताकि मूल जनजातीय समाज को मिले अधिकार
समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं जनजातीय नेता श्री अरविंद नेताम ने अपने संबोधन में कहा कि बाबा कार्तिक उरांव जी ने सदैव समाज की संस्कृति, परंपराओं और रीति-रिवाजों को जीवंत बनाए रखने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि आज जब आरक्षण और सरकारी सुविधाओं का दायरा विस्तृत हो रहा है, तब यह आवश्यक है कि ‘डीलिस्टिंग’ की प्रक्रिया के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि इन सुविधाओं का लाभ केवल मूल जनजातीय समाज को ही मिले।

उन्होंने यह भी कहा कि —
“बाबा कार्तिक उरांव जी का जीवन जनजातीय अस्मिता, शिक्षा और आत्मनिर्भरता के प्रतीक के रूप में हमारे सामने है। हमें उनके अधूरे कार्यों को पूरा कर समाज के सर्वांगीण विकास का संकल्प लेना चाहिए।”
डॉ. अरुण उरांव ने बताया – संघर्षों से मिली सफलता बनी प्रेरणा
मुख्य वक्ता के रूप में रांची से आए भारतीय पुलिस सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी डॉ. अरुण उरांव ने ‘डीलिस्टिंग’ के सामाजिक, ऐतिहासिक और संवैधानिक पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की।
उन्होंने बताया कि बाबा कार्तिक उरांव जी ने अत्यंत संघर्षों के बावजूद अपनी शिक्षा पूरी की और देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों से 11 से अधिक उपाधियाँ एवं डिग्रियाँ प्राप्त कीं।
डॉ. उरांव ने कहा —
“बाबा कार्तिक उरांव जी ने जिस संकल्प, लगन और दूरदृष्टि के साथ समाज को दिशा दी, वह आज भी हर युवा के लिए प्रेरणास्रोत है। अब समय है कि हम सभी मिलकर ‘डीलिस्टिंग’ को साकार करें।”
नंदकुमार साय ने कहा – समाज की एकता ही सबसे बड़ी शक्ति
इस अवसर पर पूर्व सांसद एवं राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. नंदकुमार साय ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जनजातीय समाज की एकता, आत्मगौरव और अधिकारों की रक्षा ही बाबा कार्तिक उरांव जी की सबसे बड़ी प्रेरणा थी।
उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज को अपने अधिकारों की रक्षा हेतु एकजुट रहना होगा और शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाना होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं उद्देश्य
संगोष्ठी की अध्यक्षता श्री गोरखनाथ बघेल, प्रांत संयोजक, जनजाति सुरक्षा मंच (उरांव समिति) ने की। उन्होंने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव जी की विचारधारा आज भी समाज के मार्गदर्शन का स्तंभ है।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में जनजातीय समाजसेवी, शिक्षाविद, महिला प्रतिनिधि और युवा वर्ग उपस्थित रहा।
संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य समाज में अधिकार, अस्तित्व और अस्मिता की रक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना तथा संवाद के माध्यम से एकजुटता स्थापित करना रहा।

