हक़ूमत का बड़ा झटका — लाखों के प्लाट काटने वाले जमीन दलालों पर प्रशासन की ताबड़तोड़ कार्रवाई: मानिकपुर डिपरापारा की करोड़ों की शासकीय ज़मीन कब्जा मुक्त, आरोपियों पर FIR दर्ज — बचने की कोई गुंजाइश नहीं!


त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ कोरबा। मानिकपुर डिपरापारा (दादर खुर्द, वार्ड-33) की खसरा संख्या 1125 पर कथित तौर पर जेसीबी से बलपूर्वक किये गए जबरन कब्जे और करोड़ों रुपये के अवैध प्लाटिंग के आरोप में प्रशासन ने आज कड़ा हाथ दिखाया — वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने जमीन को कब्जा-मुक्त कराया और उस पर विभागीय साइन-बोर्ड लगवा कर साफ कर दिया कि अब सरकारी जमीन पर किसी भी तरह की साजिश स्थान नहीं पाएगी। कार्रवाई के केंद्र में नाम आए हैं पूर्व कांग्रेस पार्षद व जमीन दलाल सीताराम चौहान, तथा आरोपियों के रूप में सामने आए लक्ष्मण लहरे, राजू सिमोन और सोनू जैन — जिनके खिलाफ पहले ही FIR दर्ज की जा चुकी है और अब जनता व प्रशासन दोनों उनसे सख्ती की माँग कर रहे हैं।
प्रशासन ने कहा — कोई छल-कपट बर्दाश्त नहीं
एसडीएम सरोज महिलांगे ने घटनास्थल का निरीक्षण कर बताया कि कई महीनों से मिलने वाली शिकायतों के बाद आज लगभग 1 एकड़ सरकारी जमीन को कब्जा-मुक्त कराया गया और उस पर विभागीय बोर्ड लगा दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया — “जो भी नाम निकलकर आएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। शासकीय जमीन पर कब्जा करने वालों के लिए अब कोई रियायत नहीं रहेगी।”
लोगों का रोष — वर्षों की मिलीभगत खुलकर सामने आई
स्थानीय ग्रामीणों और पार्षदों का आरोप है कि लंबे समय से उक्त गिरोह शासकीय जमीनों पर प्लाट काटकर करोड़ों रुपए की धाँधली कर रहा था और फर्जी कागजात बनवाकर जमीनें बेची जा रही थीं। लोगों का कहना है कि शिकायतों पर पहले कार्रवाई नहीं होती थी और शिकायतकर्ताओं को धमकियाँ दी जाती थीं — परंतु वर्तमान प्रशासन की कार्रवाई ने भू-माफियाओं में भय और उथल-पुथल पैदा कर दी है।
धमकियाँ, गाली-गलौच और महिला पार्षद पर जान से मारने की धमकी — मामूली नहीं मामला
शिकायतकर्ताओं ने बताया कि दादर खुर्द निवासी शिकायतकर्ता को लगातार गाली-गलौच और जान से मारने की धमकी दी गई — जिसके कारण उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी की है। बताया जाता है कि कुछ माह पहले एक महिला पार्षद ने शासकीय ज़मीन पर कब्जा करने का विरोध किया तो आरोपियों ने उसे गालियाँ दी और जान से मारने तक की धमकी दी — जिसके बाद प्रशासन ने उस मामले में भी कार्रवाई आरम्भ की थी और 21 घरों में से 10 घरों को कब्जा मुक्त कराया गया था। अब जो जिन घरों को दो महीने की मोहलत दी गई थी, उनका भी समय पूरा होने को है और फिर से सख्त कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं।
फर्जी दस्तावेज़ों का नेटवर्क — खरीद-फरोख्त पर तुरन्त रोक
स्थानीय शिकायतों के अनुसार भूमाफिया फर्जी दस्तावेजों के सहारे कई भूखंडों की खरीदी-बिक्री कर चुके हैं। प्रशासन ने अब जहाँ भी विभागीय बोर्ड लगाए जाएंगे, वहाँ खुली खरीद-फरोख्त और प्लाटिंग पर रोक लगाई जाएगी ताकि फर्जी दस्तावेज़ों से होने वाले सौदों पर रोक लग सके। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा सरकारी भूखंड का क्रय-विक्रय का प्रयास पाए जाने पर विधि सम्मत कार्यवाही की जाएगी और दादागिरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अब जनता की माँग — एफआईआर का पूर्ण पालन और कड़े कदम
हालाँकि एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, स्थानीय लोगों की माँग है कि पुलिस और प्रशासन मामूली कार्रवाई न करें — दोषियों के खिलाफ तेज, पारदर्शी और असरदार मुकदमाबाज़ी होनी चाहिए। वे चाहते हैं कि फर्जी दस्तावेज बनाने वालों, उन दलालों और किसी भी प्रभावशाली के विरुद्ध सम्पूर्ण छानबीन की जाए और ज़मीन जब्त कर लोगों को न्याय दिलवाया जाए।
क्या यह सिर्फ शुरुआत है?
शासकीय बोर्डों के लगाने और कब्जा मुक्त कराए जाने को स्थानीय लोग बड़ी जीत मान रहे हैं, परंतु उनका कहना है कि सिस्टम में बैठी गहरा जाल अभी भी खुलकर साफ नहीं हुआ है। व्यापक रिकॉर्ड-रेव्यू, दस्तावेजी सत्यापन और दोषियों के ऊपर संपत्ति वसूल करने जैसी कठोर कार्रवाइयाँ जरूरी हैं — तभी ही इलाके से भू-माफिया का जाल पूरी तरह टूटेगा।

