“टायर नहीं, बूस्टर फटा था!” — दीपका खदान में फिर उजागर हुई एसईसीएल की सुरक्षा लापरवाही, मजदूर के दोनों पैर काटने पड़े – अब चुप क्यों है प्रबंधन?






त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **/ दीपका (कोरबा)।
एसईसीएल दीपका क्षेत्र की खदानों में सुरक्षा के नाम पर चल रही लापरवाही ने एक बार फिर खौफनाक रूप ले लिया है। बीते दिनों हुई दर्दनाक घटना में एक मजदूर के दोनों पैर काटने पड़े — और अब सामने आ रहा है कि यह हादसा टायर फटने से नहीं, बल्कि ब्लास्टिंग में इस्तेमाल होने वाले बूस्टर के फटने से हुआ था!
घटना के बाद से प्रबंधन ने मामले को “टायर फटने की सामान्य दुर्घटना” बताकर दबाने की कोशिश की, लेकिन अब सच्चाई सामने आने लगी है। प्रत्यक्षदर्शियों और खदान के अंदर काम करने वाले अन्य कर्मचारियों के अनुसार, हादसे के समय ट्रक का पिछला टायर उस बूस्टर सामग्री के ऊपर चढ़ गया था जो विस्फोटक कार्य में प्रयुक्त होती है। इसी के साथ हुआ इतना जबरदस्त धमाका कि आसपास की मिट्टी, पत्थर और कंकर तक हवा में उड़ गए — और मजदूर का शरीर बुरी तरह झुलस गया।
डॉक्टरों को अंततः उसके दोनों पैर काटने पड़े, ताकि उसकी जान बचाई जा सके। पर सवाल यह है कि — ऐसी स्थिति में बूस्टर वहां था ही क्यों? क्या सुरक्षा निरीक्षण सिर्फ कागज़ों में हो रहा है?
🔴 गंभीर सुरक्षा चूक, जिम्मेदारी कौन लेगा?
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि यह हादसा एक “दुर्घटना” नहीं, बल्कि सुरक्षा नियमों की खुली अनदेखी का नतीजा है। खदान में कार्यरत मजदूरों को न तो उचित सुरक्षा उपकरण दिए जाते हैं, न ही ब्लास्टिंग जोन में बैरिकेडिंग की जाती है। हेलमेट, गमबूट और सेफ्टी जैकेट जैसी बुनियादी सुरक्षा सामग्रियां अक्सर नाममात्र के लिए उपलब्ध रहती हैं।
एसईसीएल और ठेका कंपनियों के बीच “काम जल्दी पूरा करने” की होड़ में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। और जब हादसे होते हैं, तो उन्हें “टायर फटने” या “मानवीय भूल” की कहानी बताकर फाइलों में बंद कर दिया जाता है।
⚠️ पहले भी दी गई थी चेतावनी
हमारे पोर्टल ने पहले भी दीपका खदान क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर कई बार रिपोर्ट प्रकाशित की थी। ब्लास्टिंग जोन में अनुशासनहीनता और जोखिम भरे हालातों को उजागर किया गया था, लेकिन प्रबंधन की ओर से कभी भी ठोस कदम नहीं उठाए गए। नतीजा — आज एक परिवार का जीवन हमेशा के लिए बदल गया।
स्थानीय मजदूर संगठनों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो, और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
💥 अब सवाल यह हैं —
क्या एसईसीएल प्रबंधन इस हादसे की जिम्मेदारी स्वीकार करेगा?
क्या भविष्य में ब्लास्टिंग जोन में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराया जाएगा?
या फिर एक और “टायर फटने” की कहानी रचकर मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा?
दीपका खदान में मजदूरों की सुरक्षा आज सबसे बड़ा सवाल बन चुकी है। यह हादसा सिर्फ एक मजदूर की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की सुस्त व्यवस्था और प्रबंधन की गैरजिम्मेदारी पर तीखा प्रहार है।
अब देखना यह है कि एसईसीएल “सत्य” का सामना करती है या फिर इसे भी “साधारण दुर्घटना” की फाइल में दफन कर देती है।





