29 अक्टूबर को ‘निर्णय की घड़ी’ — तय होगा कोरबा की श्री श्याम मित्र मंडली पर किसका अधिकार? मनोज गुट या गोपाल गुट!






त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **/ कोरबा/बिलासपुर, 17 अक्टूबर 2025।
कोरबा की प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था श्री श्याम मित्र मंडल की कार्यकारिणी पर जारी खींचतान अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है।


छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने इस बहुचर्चित विवाद पर शुक्रवार को बड़ा आदेश पारित करते हुए सहायक पंजीयक, फर्म्स एवं सोसाइटीज़ बिलासपुर को निर्देश दिया है कि वे सभी पक्षों की सुनवाई कर 45 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय सुनाएं।
अब इस संगठन पर कौन-सा गुट वैध रूप से काबिज रहेगा — मनोज अग्रवाल गुट या गोपाल अग्रवाल गुट, इसका फैसला 29 अक्टूबर 2025 को होने वाली अंतिम सुनवाई में तय होगा।
हाईकोर्ट ने कहा — “विवाद का शीघ्र समाधान आवश्यक”
यह आदेश न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकलपीठ ने याचिका क्रमांक WPC/5077/2025 में पारित किया।
न्यायालय ने कहा कि प्रकरण की परिस्थितियों को देखते हुए यह आवश्यक है कि लंबित आवेदन पर निर्धारित समय-सीमा में निर्णय लिया जाए ताकि संगठन के भीतर चल रहे प्रशासनिक ठहराव को समाप्त किया जा सके।
जज ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल प्रशासनिक प्रक्रिया को गति देने के लिए है, और न्यायालय ने मामले के गुण-दोष (Merits) पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
मनोज अग्रवाल की दलील — “सहायक पंजीयक का आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर”
याचिकाकर्ता मनोज अग्रवाल, जो स्वयं को श्री श्याम मित्र मंडल की वर्तमान कार्यकारिणी का अध्यक्ष बताते हैं, ने अदालत में दलील दी कि सहायक पंजीयक का आदेश दिनांक 4 अगस्त 2025 “अधिकार क्षेत्र से बाहर” था।
उनके अनुसार, 29 जुलाई का पत्र वैधानिक था, लेकिन उसके विपरीत 4 अगस्त को जारी नोटिस अवैध और नियमों के प्रतिकूल था।
गौरतलब है कि 4 अगस्त को सहायक पंजीयक ने दोनों पक्षों को 20 अगस्त को सुनवाई हेतु बुलाया था और मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
इस दौरान गोपाल अग्रवाल पक्ष ने अपने दस्तावेज जमा किए, जबकि मनोज अग्रवाल पक्ष ने आदेश को चुनौती देते हुए आगे की कार्यवाही से इंकार कर दिया।
बाद में मनोज अग्रवाल के कोषाध्यक्ष दीपक मित्तल और पूर्व अध्यक्ष रोहिणी सुल्तानिया ने 11 सितंबर को सहायक पंजीयक को पत्र भेजकर उक्त नोटिस को निरस्त करने की मांग की। इसी आधार पर हाईकोर्ट में यह याचिका दायर की गई थी।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद प्रशासन हरकत में — 29 अक्टूबर को होगी अंतिम सुनवाई
हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में सहायक पंजीयक श्री ज्ञान प्रकाश साहू ने दोनों गुटों — मनोज अग्रवाल और गोपाल अग्रवाल — को अंतिम सुनवाई हेतु नोटिस जारी कर दिया है।
पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि 29 अक्टूबर 2025 को दोनों पक्ष अपने-अपने मूल दस्तावेज़ों सहित उपस्थित रहें।
यदि कोई पक्ष अनुपस्थित रहता है, तो मामला एकतरफा (Ex-Parte) रूप से उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर निपटाया जाएगा।
मंडल में दोफाड़ — शहर की चर्चा में ‘श्याम मित्र मंडली विवाद’
कोरबा शहर के सामाजिक हलकों में यह मामला इन दिनों चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है।
श्री श्याम मित्र मंडल न केवल धार्मिक आयोजन करती है, बल्कि कोरबा में दशकों से सांस्कृतिक, सेवा और दान कार्यों के लिए जानी जाती है।
लेकिन बीते कुछ वर्षों से संगठन में कार्यकारिणी गठन, सदस्यता विवाद और नेतृत्व की दावेदारी को लेकर खींचतान बढ़ती चली गई।
अब सवाल यह है कि आने वाली 29 अक्टूबर की सुनवाई में कौन-सा गुट अपनी वैधता सिद्ध करेगा —
क्या मनोज अग्रवाल गुट अदालत के तर्कों से अपना पक्ष मज़बूत करेगा,
या गोपाल अग्रवाल गुट के दस्तावेज़ भारी पड़ेंगे?
अब निगाहें 29 अक्टूबर पर — तय होगा “कौन बनेगा वैध अध्यक्ष?”
सहायक पंजीयक कार्यालय में होने वाली 29 अक्टूबर की सुनवाई को लेकर दोनों पक्षों में जबरदस्त हलचल है।
कोरबा के सामाजिक जगत की निगाहें इसी दिन पर टिकी हैं —
क्योंकि यही दिन तय करेगा कि श्री श्याम मित्र मंडल की असली कार्यकारिणी कौन होगी,
और शहर की यह प्रतिष्ठित संस्था आगे किस दिशा में जाएगी।





