मेडिकल कॉलेज की सड़क बनी ‘सीवरेज का तालाब’ — प्रशासन की लापरवाही से मरीज परेशान, आयुक्त बोले– “लाइन ऊँची, सड़क नीची यही है असली बीमारी”सैकड़ों मरीज रोज़ गुजरते हैं बदबू और गंदे पानी से, अब 3.93 करोड़ की नई योजना से सुधरेगी स्थिति






कोरबा, 15 अक्टूबर 2025।शहर के मेडिकल कॉलेज क्षेत्र की सड़कों की हालत इन दिनों इतनी बदतर हो चुकी है कि मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल तक पहुँचने से पहले ही “सीवरेज की जंग” लड़नी पड़ रही है। चारों ओर फैला गंदा पानी, बदबूदार माहौल और कीचड़ में फँसे वाहन—यह नज़ारा किसी वार्ड की नहीं, बल्कि कोरबा मेडिकल कॉलेज जैसी महत्वपूर्ण जगह का है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे कई दिनों से इस समस्या से परेशान हैं। अस्पताल में रोज़ाना सैकड़ों मरीज और उनके साथ आए परिजन पहुंचते हैं, लेकिन सड़कों पर फैले सीवरेज के गंदे पानी ने स्थिति को बेहद असहनीय बना दिया है।
“यह सड़क अब सड़क नहीं, सीवरेज तालाब बन चुकी है। प्रशासन केवल निरीक्षण तक सीमित है, समाधान कोई नहीं करता,”
— एक स्थानीय निवासी ने नाराज़गी जताई।
सीवरेज लाइन ऊँचाई पर, सड़क नीची — यही है मूल जड़ : आयुक्त आशुतोष पांडे
नगर निगम आयुक्त आशुतोष पांडे ने समस्या को स्वीकार करते हुए बताया कि मेडिकल कॉलेज क्षेत्र में सीवरेज लाइन सड़क की सतह से ऊँचाई पर बनी हुई है, जबकि सड़क का स्तर नीचे है।
ऐसे में जब भी लाइन में दबाव बढ़ता है, गंदा पानी वापस सड़क पर बहने लगता है और पूरा इलाका गंदगी से भर जाता है।
आयुक्त ने बताया कि इस संबंध में कलेक्टर कोरबा को भी विस्तृत जानकारी दी गई है और कलेक्टर की अनुमति से इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नई सीवरेज नेटवर्क योजना पर कार्य शुरू किया गया है।
ड्रेनेज सिस्टम अधूरा — अब डीएमएफ और शासन फंड से बनेगा नया नेटवर्क
आयुक्त पांडे ने बताया कि वर्तमान ड्रेनेज सिस्टम अधूरा होने के कारण पानी का निकास सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा है।
इस स्थिति को सुधारने के लिए डीएमएफ फंड से 1 करोड़ 93 लाख रुपए की लागत से नई सीवरेज पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जिसे मुख्य लाइन से जोड़ा जाएगा।
इसके अलावा शासन स्तर से 2 करोड़ रुपए की स्वीकृति भी मिल चुकी है, जिससे मुख्य नाली के विस्तार और मरम्मत कार्य कराए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट टेंडर प्रक्रिया में है और आगामी 15 से 20 दिनों के भीतर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
“काम प्राथमिकता में, ठेकेदार को सख्त निर्देश” — निगम आयुक्त
आयुक्त ने कहा,
“हमारा लक्ष्य यह है कि नागरिकों को जल्द राहत मिले। ठेकेदार को निर्देश दिए जाएंगे कि कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करे।
हमारी स्वच्छता टीम लगातार निगरानी कर रही है और मशीनों के जरिए गंदे पानी की निकासी की जा रही है ताकि सड़क पर पानी न फैले।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल अस्थायी समाधान नहीं होगा — पूरे क्षेत्र का नया सीवरेज नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जिससे भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
स्थानीय जनता की मांग — “केवल प्लान नहीं, अब ज़मीन पर काम दिखे”
स्थानीय लोगों ने निगम और जिला प्रशासन से मांग की है कि केवल फाइलों में योजना बनाने की बजाय जमीन पर कार्य की गति तेज़ की जाए।
मरीजों और आम नागरिकों के लिए मेडिकल कॉलेज तक का रास्ता किसी ‘यातना मार्ग’ से कम नहीं है। बारिश या सीवरेज के दबाव में यह सड़क पूरी तरह जलमग्न हो जाती है।
निवासियों ने कहा कि अगर 15 दिनों में सुधार कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे सामूहिक रूप से नगर निगम कार्यालय के सामने प्रदर्शन करेंगे।
अब उम्मीद की किरण — 3.93 करोड़ की परियोजना से मिल सकती है राहत
डीएमएफ और शासन फंड मिलाकर लगभग 3.93 करोड़ रुपए की संयुक्त परियोजना से उम्मीद की जा रही है कि मेडिकल कॉलेज क्षेत्र में फैली यह गंदगी और जलभराव की समस्या जल्द खत्म होगी।
संपूर्ण मामला यह दिखाता है कि स्मार्ट सिटी के दौर में भी कोरबा जैसे औद्योगिक जिले में बुनियादी सुविधाएँ प्रशासनिक देरी की भेंट चढ़ी हुई हैं।
अब देखना यह होगा कि निगम और कलेक्टर की संयुक्त पहल इस “सीवरेज संकट” का स्थायी समाधान बन पाती है या नहीं।





