February 11, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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दीपका परियोजना में बड़ा धमाका — एसईसीएल की लापरवाही से मजदूर गंभीर रूप से घायल, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे भारी सवाल

सुरक्षा मानकों की खुली पोल, हर हादसे के बाद सिर्फ़ जांच की रस्म — ज़मीन पर नहीं दिख रहा सुधार


त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ***/ कोरबा, 15 अक्टूबर 2025।
दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की दीपका परियोजना में आज दोपहर एक बार फिर लापरवाही ने बड़ा हादसा करा दिया। खदान क्षेत्र में ब्लास्टिंग के दौरान हुए जोरदार विस्फोट में एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना ने एक बार फिर एसईसीएल की सुरक्षा तैयारियों और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ब्लास्टिंग के वक्त फटे कंडम वाहन के टायर, उड़ते पत्थरों ने मचा दी तबाही
जानकारी के अनुसार हादसा दोपहर में उस वक्त हुआ जब दीपका परियोजना के ओपन कास्ट माइंस क्षेत्र में ब्लास्टिंग की जा रही थी। विस्फोट के कुछ ही क्षण बाद, पुराने और कंडम वाहनों के टायर फट गए जिससे पत्थर और धूल के तेज़ गोले हवा में उछले और पास खड़े मजदूरों पर आ गिरे।
इस दौरान मजदूर गणेश राम (निवासी कुसमुंडा) गंभीर रूप से घायल हो गया। साथी मजदूरों ने तत्काल सुरक्षा कर्मियों को सूचना दी और एंबुलेंस से उसे नेहरू शताब्दी अस्पताल, गेवरा दीपका पहुंचाया गया, जहां उसकी हालत फिलहाल नाजुक बताई जा रही है।
मजदूरों का फूटा गुस्सा — “सुरक्षा सिर्फ़ कागज़ों में, मैदान में मौत के साये में काम”
घटना के बाद मौके पर मौजूद मजदूरों ने एसईसीएल दीपका प्रबंधन के खिलाफ जमकर आक्रोश व्यक्त किया।
मजदूरों ने कहा कि “ब्लास्टिंग के दौरान न तो सुरक्षा घेरा बनाया गया, न चेतावनी दी गई और न ही हमें सुरक्षित दूरी पर जाने को कहा गया। यहां हर बार हादसे के बाद जांच की बात होती है, लेकिन असल में कुछ नहीं बदलता।”
एक अन्य कर्मचारी ने कहा, “सुरक्षा के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। जब तक कोई हादसा नहीं होता, तब तक अधिकारियों को कोई परवाह नहीं रहती। हादसे के बाद दिखावे की मीटिंगें होती हैं और फाइलें ठंडी पड़ जाती हैं।”
सुरक्षा मानकों की खुली पोल — प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, ब्लास्टिंग से पहले जिन मानकों और सावधानियों का पालन करना अनिवार्य है, उनका पूरी तरह उल्लंघन किया गया। खदान में सुरक्षा कर्मी मौजूद नहीं थे और चेतावनी सायरन भी सही समय पर नहीं बजाया गया।
यह पहली बार नहीं है जब दीपका परियोजना में इस तरह की घटना घटी हो — बीते कुछ महीनों में भी कई बार हल्के हादसे सामने आए हैं, जिन्हें प्रबंधन ने दबा दिया था।
अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा मजदूर गणेश राम
नेहरू शताब्दी अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार, घायल गणेश राम के सिर, छाती और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं। डॉक्टरों की एक विशेष टीम उसकी स्थिति पर लगातार निगरानी रख रही है। अस्पताल सूत्रों का कहना है कि घायल की हालत अब भी “बेहद चिंताजनक” बनी हुई है।
प्रबंधन मौन — जांच की तैयारी, पर जवाबदेही गायब
घटना के बाद दीपका प्रबंधन ने हादसे की जांच की बात कही है, लेकिन मौके पर मौजूद कर्मचारियों का कहना है कि हर बार जांच की बात कहकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और श्रम विभाग से एसईसीएल प्रबंधन की जिम्मेदारी तय करने और सुरक्षा उपायों की वास्तविक समीक्षा कराने की मांग की है।
यह घटना फिर एक बार साबित करती है कि खदानों में काम कर रहे मजदूर आज भी मौत के साये में अपनी रोज़ी-रोटी कमा रहे हैं — जबकि कागज़ों में सुरक्षा का दावा हमेशा “संपूर्ण” बताया जाता है।

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