ग्राम स्वराज के सशक्तिकरण का संकल्प: छत्तीसगढ़ राज्य पंचायत परिषद सम्मेलन छतौद में संपन्नत्रिस्तरीय पंचायतों को अधिकार संपन्न बनाने की हुई जोरदार मांग – राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक जादौन ने किया एकजुटता का आह्वान






तिल्दा/छतौद। छत्तीसगढ़ राज्य पंचायत परिषद द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय पंचायत परिषद सम्मेलन का भव्य आयोजन तिल्दा ब्लॉक के ग्राम छतौद में संपन्न हुआ। इस अवसर पर देशभर से आए पंचायत प्रतिनिधियों, पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने ग्राम स्वराज, पंचायत सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन की अध्यक्षता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अशोक जादौन ने की, जिन्होंने अपने संबोधन में पंचायतों की भूमिका और ग्राम विकास की दिशा में पंचायत परिषद की ऐतिहासिक भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक जादौन ने कहा कि यदि त्रिस्तरीय पंचायत पदाधिकारी एकजुट हो जाएं, तो देश के गांवों की हर समस्या का समाधान स्वयं संभव है। उन्होंने कहा कि पंचायत परिषद द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर ही 73वें संविधान संशोधन के बाद त्रिस्तरीय पंचायत राज की संरचना बनी। भारत रत्न जय प्रकाश नारायण और डॉ. बलवंत राय मेहता द्वारा प्रतिपादित ग्राम स्वराज की संकल्पना का उद्देश्य सत्ता का विकेंद्रीकरण और ग्राम पंचायतों को अधिक अधिकार देना था। किंतु आज भी छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में यह व्यवस्था केवल कागजों में सिमटकर रह गई है। “जमीनी स्तर पर अधिकारी ही ग्राम सरकार चला रहे हैं, जबकि यह अधिकार जनप्रतिनिधियों को होना चाहिए,” उन्होंने कहा। उन्होंने सभी पंचायत पदाधिकारियों से परिषद से जुड़ने और एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।
परिषद की राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी वर्मा ने कहा कि पंचायतें विकास की धुरी हैं और यदि राष्ट्र को विकसित बनाना है, तो गांवों का सशक्त विकास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब किसी कार्य में अनजाने में त्रुटि होती है, तो पंचायत प्रतिनिधियों पर धारा 40 लगाकर पद से बेदखली और वसूली की कार्रवाई होती है, जबकि समान रूप से जिम्मेदार अधिकारी और सचिव दंड से बच निकलते हैं। उन्होंने महिला जनप्रतिनिधियों से कहा कि “सरकार ने 50% महिला आरक्षण देकर महिलाओं के हाथ में ग्राम सरकार सौंपी है, अतः स्वावलंबी बनें, अधिकारों को समझें और जन आकांक्षाओं को पूरा करें।”
जिला पंचायत सभापति स्वाति वर्मा ने उपस्थित जनपद सदस्य, सरपंचों और पंचों को संबोधित करते हुए कहा कि जनता जनप्रतिनिधियों को बहुत अपेक्षाओं के साथ चुनती है। “पांच साल बाद हमें जनता के बीच अपना रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत करना होता है। इसलिए हमें एकजुट होकर कार्य करना चाहिए ताकि जनता की आशाओं पर खरे उतर सकें। अखिल भारतीय पंचायत परिषद इस दिशा में हमारा सजग साथी बनेगा, जो हमारी बात केंद्र और राज्य सरकार तक पहुंचाएगा।”
छत्तीसगढ़ पंचायत परिषद के महासचिव अनुपम अग्रवाल ने परिषद की राज्य में प्रगति और विस्तार का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि परिषद की ऐतिहासिक भूमिका राष्ट्रनिर्माण में रही है। “इस परिषद ने देश को लाल बहादुर शास्त्री और मोरारजी देसाई जैसे प्रधानमंत्री दिए हैं। अनेक मुख्यमंत्री, सांसद और विधायक इसी परिषद से निकले हैं। कई संघ और संगठन बन सकते हैं, लेकिन परिषद देश में एक ही है — हमारा परिषद।” उन्होंने पंचायत जनप्रतिनिधियों को भी विधायक और सांसदों की तरह पेंशन एवं भत्ते दिए जाने की मांग रखी। इस पर राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक जादौन ने आश्वासन दिया कि इस मांग का प्रस्ताव केंद्रीय पंचायत मंत्रालय को भेजा जाएगा।
सम्मेलन में विभिन्न जिलों से आए सरपंचों और जनपद सदस्यों ने अपनी समस्याएँ रखीं, जिनका समाधान राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक जादौन ने तत्परता से किया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से मध्यप्रदेश परिषद अध्यक्ष अशोक सेंगर, छत्तीसगढ़ परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि उदय सिंह, मीडिया प्रभारी पीयूष मिश्रा, उपाध्यक्ष पंचम पटेल, राष्ट्रीय हिंदी मेल के संपादक सूर्य कुमार राय सहित अंबिकापुर, जशपुर, बिलासपुर, बेरला, दुर्ग, बलौदाबाजार, रायपुर आदि जिलों से आए वर्तमान एवं पूर्व पंचायत पदाधिकारी और अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
यह सम्मेलन ग्राम स्वराज और सशक्त पंचायत व्यवस्था के लिए एक नई ऊर्जा लेकर आया, जिसमें पंचायत प्रतिनिधियों ने मिलकर यह संकल्प लिया कि वे गांवों के विकास और पंचायत अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर कार्य करेंगे।
🌿✨





