डीपीओ रेणु प्रकाश ने लगाया आरोपों को निराधार बताया, कहा — “परियोजना अधिकारी से न तो कोई कमीशन मांगा, न ही की गई कोई प्रताड़ना”






कोरबा।महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़े एक मामले में जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) श्रीमती रेणु प्रकाश ने अपने ऊपर लगाए गए 50 हजार रुपये मांगने के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उन्होंने एक विज्ञप्ति जारी कर स्पष्ट किया कि उनके द्वारा किसी भी परियोजना अधिकारी से न तो किसी प्रकार की कमीशन की मांग की गई है, और न ही कोई प्रताड़ना की गई है।
श्रीमती प्रकाश ने बताया कि परियोजना अधिकारी, कोरबा ग्रामीण द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं। परियोजना अधिकारी ने यह आरोप लगाया था कि उनका लंबित अवकाश प्रकरण निपटाने के लिए उनसे 50 हजार रुपये मांगे गए, जबकि वस्तुतः मामला कुछ और ही है।
डीपीओ ने बताया — सर्विस बुक बिना अनुमति के रखी गई अपने पास
डीपीओ रेणु प्रकाश ने बताया कि वर्ष 2022-23 का अवकाश स्वीकृत कराने के संबंध में परियोजना अधिकारी द्वारा दबाव बनाया जा रहा था। परीक्षण के दौरान यह पाया गया कि उनकी सर्विस बुक, जो कि जिला कार्यालय में सुरक्षित रहनी चाहिए, उसे बिना पूर्व अनुमति के परियोजना अधिकारी ने अपने पास रखा था।
जांच में पाया गया कि सर्विस बुक में अवकाश स्वीकृति के इन्द्राज सहायक ग्रेड-01 से कराए गए थे, जबकि इसके लिए कोई दस्तावेज या स्वीकृति आदेश उपलब्ध नहीं थे। संबंधित नस्ती में भी कोई हस्ताक्षरित आदेश या प्रमाण नहीं मिला। इस पर कार्यालय द्वारा परियोजना अधिकारी को कारण बताओ सूचना पत्र (Show Cause Notice) जारी किया गया।
बार-बार जवाब नहीं देने पर जारी हुआ चेतावनी पत्र
डीपीओ ने बताया कि पहली बार जारी कारण बताओ सूचना पत्र का जवाब परियोजना अधिकारी द्वारा प्रस्तुत किया गया, परंतु वह तथ्यात्मक नहीं पाया गया। इसके बाद दोबारा कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया, जिसका जवाब परियोजना अधिकारी ने नहीं दिया।
इस पर विभाग द्वारा उन्हें चेतावनी पत्र जारी किया गया।
समीक्षा बैठक में किया गया कार्यों का मूल्यांकन
श्रीमती प्रकाश ने कहा कि 8 अक्टूबर 2025 को जिले की सभी बाल विकास परियोजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। बैठक के दौरान बाल विकास परियोजना कोरबा ग्रामीण की समीक्षा में पाया गया कि कई कार्यों में लापरवाही बरती जा रही है। इसलिए परियोजना अधिकारी को उनके कार्य के प्रति जागरूकता लाने और सुधार के लिए निर्देश दिए गए।
बैठक के दौरान परियोजना अधिकारी ने डीपीओ पर दबाव डालते हुए कहा कि उनका अवकाश स्वीकृत किया जाए, अन्यथा वह शिकायत करेंगी। अगले ही दिन — 9 अक्टूबर 2025 को — मीडिया में यह खबर आई कि डीपीओ और लिपिक द्वारा 50 हजार रुपये की मांग की गई है।
“शिकायत निराधार और बदनाम करने की नियत से की गई” — डीपीओ
डीपीओ रेणु प्रकाश ने स्पष्ट किया कि विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान या किसी भी स्तर पर उनके अथवा लिपिक द्वारा परियोजना अधिकारी से किसी प्रकार की कमीशन या प्रताड़ना नहीं की गई। उन्होंने कहा कि यह शिकायत पूरी तरह निराधार, तथ्यों से परे और व्यक्तिगत रूप से बदनाम करने की नियत से की गई है।
विभागीय स्तर पर जारी है आंतरिक जांच
महिला एवं बाल विकास विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण की विभागीय स्तर पर आंतरिक जांच प्रक्रिया जारी है, ताकि तथ्यों की पुष्टि कर आगे की कार्रवाई तय की जा सके।





